Crude Oil Price Drop 2026: अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही शुरू; युद्ध के समय की सारी बढ़त गंवाकर क्रूड ऑयल धड़ाम

वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए एक और बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम शांति समझौते के बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से समुद्री जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। इस बड़े घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा और यह हफ्ता क्रूड ऑयल के लिए पिछले कई महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक मंदी का गवाह बनने की ओर अग्रसर है।

शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक तेल सूचकांकों में आई गिरावट का ताजा आंकड़ा निम्नलिखित है:

  • ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड 0.84% ​​की गिरावट के साथ $79.18 प्रति बैरल पर आ गया है।

  • WTI क्रूड फ्यूचर्स (West Texas Intermediate): अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क भी 0.67% टूटकर $76.09 प्रति बैरल के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।

इस ताजा बिकवाली के चलते कच्चे तेल के वायदा बाजार (Crude Futures) ने युद्ध के कारण हुई अपनी लगभग सारी बढ़त को पूरी तरह गंवा दिया है। गौरतलब है कि कच्चे तेल के दामों में यह भारी उछाल इस साल फरवरी में तब शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर उस पर सैन्य हमले किए थे। फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाला यह जलमार्ग, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा वहन करता है, तेहरान और वाशिंगटन दोनों की तरफ से की गई दोहरी नाकाबंदी (Double Blockade) का सामना कर रहा था।

समुद्र में ट्रैफिक हुआ बहाल; नेवल बॉडी ने जारी की ‘माइन’ से बचने की एडवायजरी

शांति समझौते की घोषणा के बाद जमीनी स्तर पर स्थितियां तेजी से बदल रही हैं और तेल परिवहन को सुचारू बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं:

  1. जहाज रवाना और कुवैत का बड़ा कदम: होर्मुज जलडमरूमध्य में पिछले कई हफ्तों से फंसे कच्चे तेल से लदे विशाल टैंकर और कमर्शियल जहाज गुरुवार से अपने गंतव्यों के लिए रवाना होने लगे हैं। इसी बीच प्रमुख तेल उत्पादक देश कुवैत ने घोषणा की है कि वह बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए कच्चे तेल का उत्पादन (Production) बढ़ाना शुरू कर देगा।

  2. प्रतिबंध हटे: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (US Central Command) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उसने ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक पर लगाई गई सभी पाबंदियों को पूरी तरह से हटा लिया है।

  3. नेवल एडवायजरी: नौसैनिक सूचनाओं से जुड़ी एक अहम अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर’ (JMIC) ने इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों के लिए एक जरूरी सुरक्षा गाइडलाइन जारी की है। केंद्र ने कप्तानों को सलाह दी है कि वे युद्ध के दौरान बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) से बचने के लिए ओमान के समुद्र तट के करीब वाले सुरक्षित समुद्री रास्ते का ही इस्तेमाल करें।

“तेल नीचे और स्टॉक्स ऊपर, बाजार को यह पसंद आ रहा है” — डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस अंतरिम समझौते को लेकर अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहस भी तेज हो गई है। ईरान के कट्टर विरोधियों और अमेरिका के कुछ सहयोगी देशों ने इस डील की आलोचना करते हुए दावा किया है कि इस समझौते में राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान (ईरान) को बहुत ज्यादा आर्थिक छूट दे दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन आलोचनाओं का करारा जवाब देते हुए इस डिप्लोमैटिक सफलता की जमकर तारीफ की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा:

“वैश्विक बाजार को यह बदलाव बहुत पसंद आ रहा है कि कच्चे तेल की कीमतें बहुत नीचे आ गई हैं और शेयर बाजार (Stocks) रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहे हैं।”

दूसरी तरफ, अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने उन चिंताओं को पूरी तरह से खारिज और कमतर आंका है, जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान भविष्य में अपनी कमाई बढ़ाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ट्रैफिक पर भारी ‘टोल टैक्स’ लगा सकता है। जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि इस हस्ताक्षरित मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत दोनों देशों के पास विवादित और तकनीकी विवरणों पर बारीकी से काम करने के लिए 60 दिनों का पर्याप्त समय शुरू हो गया है, जिसमें सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

होर्मुज को पूरी तरह खोलना एक लंबा और जटिल ऑपरेशन

भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिर गई हों, लेकिन शिपिंग विशेषज्ञों और कार्गो कंपनियों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को उसकी पुरानी 100% परिचालन क्षमता पर वापस लाना एक बेहद मुश्किल, संवेदनशील और लंबा चलने वाला ऑपरेशन साबित हो सकता है।

इस पूरी व्यवस्था को पहले की तरह सुचारू बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निम्नलिखित चार बड़े मोर्चों पर सहमति और काम होना अनिवार्य है:

  • डी-माइनिंग ऑपरेशन (De-mining): जलमार्ग में बिछी खतरनाक बारूदी सुरंगों को पूरी तरह से साफ करना।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत: युद्ध और पाबंदियों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए बंदरगाहों और नेविगेशन प्रणालियों को ठीक करना।

  • कुओं को दोबारा चालू करना: बंद पड़े तेल के कुओं को फिर से चालू कर उत्पादन को सुव्यवस्थित करना।

  • जहाजों की री-पोजिशनिंग: कमर्शियल जहाजों और बड़े कार्गो को उनकी सही रणनीतिक पोजीशन पर वापस लाना।

यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर कुछ बड़े जहाजों के मालिक और अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियां (Insurance Firms) फारस की खाड़ी के मौजूदा हालातों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी भी बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं और पूरी तरह सतर्कता बरत रही हैं।