
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में अचानक आए तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब द्वारा उठाए गए एहतियाती कदमों और मध्य पूर्व के तनाव के बीच वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है। वायदा बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 3% से अधिक की छलांग लगाकर $108 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया है, वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी उछलकर $103 प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति संकट लंबा खिंचता है, तो वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें एक बार फिर आम उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा वार कर सकती हैं।
कच्चे तेल में आई इस ताजा तेजी के केंद्र में सऊदी अरब का बुनियादी ढांचा और आपूर्ति से जुड़ा कड़ा फैसला है:
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ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का अस्थायी शटडाउन: हालिया हमलों और सुरक्षा खतरों के मद्देनजर सऊदी अरब ने अपनी रणनीतिक ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (East-West Pipeline) के संचालन को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह पाइपलाइन प्रतिदिन लगभग 40 से 50 लाख बैरल कच्चा तेल पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर स्थित यानबू (Yanbu) बंदरगाह तक पहुंचाती है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य का बाईपास ठप: फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर बढ़ते तनाव के बीच यह पाइपलाइन सुरक्षित समुद्री मार्ग का मुख्य विकल्प थी। इसके बंद होने से लाल सागर के रास्ते होने वाला सऊदी तेल का निर्यात सीधे प्रभावित हुआ है।
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उत्पादन स्तर में तेज गिरावट: हालिया ओपेक (OPEC) रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा अवरोधों के चलते सऊदी अरब का घरेलू तेल उत्पादन घटकर दशकों के निचले स्तरों पर पहुंच गया है, जिससे बाजार में भौतिक कच्चे तेल (Physical Crude) की उपलब्धता घट गई है।
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यानबू पोर्ट पर सीमित इन्वेंट्री: ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक यानबू पोर्ट पर स्टोरेज में केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल शेष है। यदि बहाली में देरी होती है, तो वैश्विक बाजार से रोजाना लगभग 4% आपूर्ति सीधे गायब हो सकती है।
वैश्विक एक्सचेंजों पर कच्चे तेल के ताजा आंकड़े आपूर्ति संकट की गंभीरता को दर्शाते हैं:
| क्रूड बेंचमार्क | हालिया स्तर ($/बैरल) | साप्ताहिक बदलाव (%) | प्रमुख कारण |
| ब्रेंट क्रूड (Brent) | ~$107.80 – $108.20 | +3.5% से अधिक | सऊदी पाइपलाइन बंदी व भू-राजनीतिक तनाव |
| WTI क्रूड (US) | ~$102.50 – $103.20 | +3.2% की बढ़त | अमेरिकी इन्वेंट्री में भारी गिरावट |
| रिफाइंड ईंधन (डीजल/गैसोलिन) | उच्च प्रीमियम पर | +4.8% की तेजी | वैश्विक रिफाइनरियों में आपूर्ति का अभाव |
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का सीधा संबंध भारत के व्यापार घाटे, मुद्रा और खुदरा ईंधन दरों से होता है:
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सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव: जब तक कच्चा तेल $75 से $82 के दायरे में रहता है, भारतीय तेल विपणन कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) मुनाफे में रहती हैं। क्रूड के $100 के पार लंबे समय तक टिके रहने से कंपनियों का रिफाइनिंग मार्जिन नकारात्मक हो जाता है।
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खुदरा कीमतों पर तत्काल प्रभाव नहीं, लेकिन जोखिम कायम: त्योहारों के मौसम को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल खुदरा पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश करेंगी। हालांकि, यदि ब्रेंट क्रूड $108 से ऊपर बना रहता है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी या उत्पाद शुल्क में समायोजन का दबाव बन सकता है।
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रुपये और महंगाई पर दोहरी मार: तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे भारतीय रुपया कमजोर होता है। आयात महंगा होने से माल ढुलाई और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
कमोडिटी रिसर्च फर्मों का आकलन है कि वर्तमान तेल बाजार ‘बैकवर्डेशन’ (Backwardation) की स्थिति में पहुंच गया है, जहां तुरंत डिलीवरी वाले कच्चे तेल की कीमतें भविष्य के अनुबंधों से काफी अधिक हैं। जब तक सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को पूरी क्षमता से दोबारा शुरू नहीं करता या ओपेक प्लस (OPEC+) के अन्य देश अतिरिक्त आपूर्ति जारी नहीं करते, तब तक तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
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