अमेरिका-ईरान तनाव थमने के बाद भी नहीं संभला कच्चा तेल, अब इन 4 देशों के टकराव से मंडराया बड़ा संकट

लंबे समय से वैश्विक अर्थव्यवस्था की सांसें अटकाने वाला अमेरिका और ईरान का सीधा विवाद भले ही कुछ हद तक शांत पड़ता दिख रहा हो, लेकिन दुनिया के लिए राहत अभी बहुत दूर है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति में एक मोर्चा बंद होते ही अब चार अन्य बड़े देशों के बीच नए सिरे से सिरफुटव्वल शुरू हो गई है। इस ताजा टकराव ने चौतरफा तनाव बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर देखने को मिल रहा है। इस नए संकट के पैदा होते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर आसमान छूने लगी हैं, जिससे भारत सहित दुनिया भर के नीति निर्माताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।

नए मोर्चों पर भड़की जंग और तेल बाजार में खलबली

विशेषज्ञों का मानना था कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत आगे बढ़ने से ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी, मगर ऐसा हो न सका। जैसे ही इन दोनों महाशक्तियों के बीच तल्खी कम हुई, वैसे ही अन्य चार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देशों में आंतरिक और सीमावर्ती विवाद चरम पर पहुंच गए। इन देशों में भड़के ताजा राजनीतिक और सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। तेल निर्यात करने वाले प्रमुख मार्गों के पास हो रही इस उठापटक ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है, जिसके चलते कमोडिटी मार्केट में अचानक बिकवाली और कच्चे तेल के दामों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

महंगाई की नई लहर का खतरा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

कच्चे तेल के भाव में आई इस ताजा तेजी ने दुनिया के सामने एक बार फिर महंगाई का नया संकट खड़ा कर दिया है। जो देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाली है। तेल महंगा होने से न केवल परिवहन लागत बढ़ेगी, बल्कि दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ने की आशंका है। फिलहाल, इन चार देशों के बीच शुरू हुआ यह नया विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।