‘वंदे मातरम’ पर फिर छिड़ा विवाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई कड़ी आपत्ति

देश में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बार फिर बहस गरमा गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस गीत को अनिवार्य किए जाने की कोशिशों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वह ‘वंदे मातरम’ गाए जाने के विरोध में है और इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं का हवाला दिया है। इतना ही नहीं, बोर्ड ने अब इस मामले में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दे दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने के आसार हैं।

आखिर ‘वंदे मातरम’ से क्या है आपत्ति?

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि इस्लाम में केवल एक ईश्वर (अल्लाह) की इबादत का प्रावधान है। ‘वंदे मातरम’ के कुछ अंशों में मातृभूमि की वंदना को एक देवी के रूप में पेश किया गया है, जो मुस्लिम समुदाय की धार्मिक मान्यताओं और ‘एकेश्वरवाद’ के सिद्धांतों के खिलाफ है। बोर्ड के पदाधिकारियों का तर्क है कि किसी भी नागरिक को उसकी धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध ऐसा गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जो उसके विश्वास से मेल न खाता हो।

कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा पर्सनल लॉ बोर्ड

बोर्ड की हालिया बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई है। बोर्ड ने कहा है कि अगर सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों में इसे अनिवार्य रूप से थोपा जाता है, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। बोर्ड का मानना है कि थोपी गई देशभक्ति किसी के मौलिक अधिकारों का हनन है।

सरकार और शिक्षा संस्थानों को चेतावनी

बोर्ड ने विशेष रूप से स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ की अनिवार्यता को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सभी धर्मों के छात्रों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर अदालती फैसले आ चुके हैं, लेकिन पर्सनल लॉ बोर्ड का ताजा रुख एक नई कानूनी जंग की ओर इशारा कर रहा है।

संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और उसे मानने की आजादी देता है। बोर्ड इसी संवैधानिक अधिकार को अपनी कानूनी लड़ाई का आधार बनाने की तैयारी में है। अब देखना यह होगा कि इस चेतावनी के बाद केंद्र सरकार और अन्य संगठन इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।