CJP प्रदर्शनकारी और दिल्ली पुलिस: क्या वापस होंगे केस? जानें मामले से जुड़े सभी बड़े अपडेट

संसद परिसर और जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के बाद अब दिल्ली पुलिस नरमी बरतने के मूड में नजर आ रही है। सूत्रों की मानें तो पुलिस इन प्रदर्शनों से जुड़े मुकदमों को वापस लेने पर विचार कर रही है और इसके लिए ठीक वही प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, जिसका इस्तेमाल 2022 में किसान आंदोलन के दौरान किया गया था। इस मामले की स्थिति मंगलवार, 28 जुलाई तक पूरी तरह स्पष्ट होने की उम्मीद है।

आइए, इस पूरे मामले के मुख्य बिंदुओं और दिल्ली पुलिस के संभावित कदमों को विस्तार से समझते हैं:

1. क्या है 2022 का ‘केस वापसी’ मॉडल?

वर्ष 2022 में जब किसान आंदोलन से जुड़े केस वापस लिए गए थे, तब दिल्ली पुलिस, तत्कालीन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (LG) कार्यालय के बीच बेहतरीन समन्वय (Coordination) देखा गया था।

  • उस दौरान पुलिस ने 17 मामलों को वापस लेने का प्रस्ताव तत्कालीन AAP सरकार को भेजा था।

  • यह फाइल एलजी कार्यालय से होते हुए तत्कालीन गृह मंत्री सत्येंद्र जैन और फिर मुख्यमंत्री कार्यालय तक गई थी।

  • अंततः 28 फरवरी को एलजी कार्यालय से इसे एक ही दिन में मंजूरी मिल गई थी।

    अब दिल्ली पुलिस कानूनी विशेषज्ञों से राय ले रही है कि CJP प्रदर्शन के मामलों में भी इसी मॉडल को कैसे लागू किया जाए या फिर सीधे दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर FIR रद्द (Quash) कराने का अनुरोध किया जाए।

2. 15 से ज्यादा FIR और पुलिस की रणनीति

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों को लेकर अब तक 15 से ज्यादा FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने, सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने, आपराधिक साजिश रचने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और यहां तक कि हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।

  • किसे मिलेगी राहत: सूत्रों का कहना है कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिनकी भूमिका जांच में गंभीर नहीं पाई गई है, उन्हें इस जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

  • किस पर होगा एक्शन: जांच एजेंसियों ने कुछ असामाजिक तत्वों की पहचान भी की है, जिनकी भूमिका संदिग्ध है। ऐसे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी।

3. वॉलिंटियर जुनैद का पुलिस पर गंभीर आरोप

इस पूरे घटनाक्रम में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। प्रदर्शनकारियों को खाना और पानी बांटने वाले जुनैद नाम के एक स्वयंसेवक (Volunteer) ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

  • जुनैद का दावा है कि शुक्रवार रात पुलिसकर्मी उसे जबरन अपने साथ ले गए, उसकी आंखों पर पट्टी बांधी और पूछताछ के बाद उसे अगले दिन उत्तराखंड के मसूरी में छोड़ दिया।

  • पुलिस ने उससे यह जानने की कोशिश की कि इतने बड़े स्तर पर भोजन बांटने के लिए फंडिंग कहां से आ रही है।

  • जुनैद ने सफाई दी है कि यह सब समर्थकों के दान से मुमकिन हो पाया। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि जुनैद के इन दावों की जांच की जा रही है।

4. पीएम मोदी और नेताओं के खिलाफ पोस्ट पर कड़ा एक्शन

जमीनी कार्रवाई के साथ-साथ दिल्ली पुलिस डिजिटल दुनिया पर भी कड़ी नजर बनाए हुए है। विरोध-प्रदर्शन की आड़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य राजनेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट्स को लेकर पुलिस सख्त है।

  • दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम एक्टिव हो चुकी है।

  • ऐसी पोस्ट्स, वीडियो और कमेंट्स को तुरंत हटाने के लिए विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को जल्द ही कानूनी नोटिस जारी किए जा सकते हैं।

  • पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या किसी कंटेंट से कानून व्यवस्था और शांति भंग होने का खतरा था।

कुल मिलाकर, आने वाले कुछ दिन CJP प्रदर्शनकारियों के लिए काफी अहम होने वाले हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कानूनी राय के बाद दिल्ली पुलिस किस दिशा में कदम बढ़ाती है।