CJP के बाद अब देश में आई ‘E20 जनता पार्टी’, पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के विरोध में सोशल मीडिया पर छिड़ी नई जंग

भारत के राजनीतिक और सोशल मीडिया पटल पर इन दिनों अनूठे ट्रेंड्स देखने को मिल रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बाद अब इंटरनेट पर ‘E20 जनता पार्टी’ का उदय हो चुका है, जिसने आते ही सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। पेट्रोल में एथनॉल (E20) मिलाए जाने के लंबे समय से चल रहे विरोध के बीच अब इस मुहिम ने एक राजनीतिक पार्टी का रूप ले लिया है। खास बात यह है कि इस नई पार्टी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर युवाओं और मध्यम वर्ग का भारी समर्थन मिल रहा है, और कुछ ही घंटों में इसके फॉलोवर्स तेजी से आसमान छूने लगे हैं।

जंतर-मंतर पर CJP के सफल आंदोलन के बाद शुरू हुआ नया डिजिटल ट्रेंड

कुछ समय पहले सीजेआई सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का गठन हुआ था, जिसके नेतृत्व में जंतर-मंतर पर महीनेभर से ज्यादा समय तक ऐतिहासिक छात्र आंदोलन चला। इस आंदोलन के भारी दबाव के चलते आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और शिक्षा मंत्रालय का प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया। CJP का यह आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसकी सफलता से प्रेरित होकर अब पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण के खिलाफ ‘E20 जनता पार्टी’ सामने आ गई है, जो तेजी से इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

‘हमारी गाड़ियों पर एक्सपेरिमेंट करना बंद करो’, E20 जनता पार्टी की तीखी मांग

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर E20 जनता पार्टी के फॉलोवर्स कुछ ही घंटों में हजारों की संख्या में बढ़ चुके हैं। पार्टी की तरफ से सोशल मीडिया पर तीखा रुख अपनाते हुए लिखा गया है कि भारत के आम नागरिकों और मध्यम वर्ग की गाड़ियों पर इस तरह के एक्सपेरिमेंट करना तुरंत बंद किया जाना चाहिए। पोस्ट में कहा गया है कि गाड़ियां कोई टेस्ट मशीन नहीं हैं, जिन्हें भारी-भरकम टैक्स चुकाकर और मेहनत की कमाई से खरीदने के बाद इस तरह के बदलावों के हवाले कर दिया जाए। फ्यूल एफिशिएंसी और गाड़ी की परफॉर्मेंस सीधे तौर पर आम आदमी के रोजमर्रा के बजट पर असर डालती है, इसलिए जनता अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार चाहती है।

E20 जनता पार्टी के सामने रखी गईं मुख्य मांगें और CJP की पृष्ठभूमि

इस नई पार्टी की ओर से मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें उठाई गई हैं। इनमें पहला यह है कि गाड़ियों में वही ईंधन इस्तेमाल होना चाहिए जिसकी सलाह गाड़ी के मैन्युफैक्चरर ने दी हो, दूसरा आम नागरिकों और उनकी संपत्तियों पर किसी भी तरह का जबरदस्ती एक्सपेरिमेंट न किया जाए, और तीसरा उपभोक्ताओं को उस फ्यूल को चुनने की पूरी आजादी मिले जिस पर वे भरोसा करते हैं। आपको बता दें कि इस पूरी डिजिटल राजनीतिक संस्कृति की शुरुआत बॉस्टन में रह रहे अभिजीत दीपके द्वारा CJP के गठन से हुई थी, जिसने देश के युवाओं को जोड़कर एक नया राजनीतिक विकल्प खड़ा कर दिया है और अब इसी तर्ज पर ईंधन नीति के खिलाफ E20 जनता पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है।