
देश भर में बिकने वाली जीवनरक्षक और सामान्य दवाओं की गुणवत्ता पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने अपनी नवीनतम जांच रिपोर्ट में बेहद चिंताजनक खुलासा किया है। जुलाई महीने में देश भर से एकत्र किए गए दवा सैंपल्स की लैब टेस्टिंग के बाद 280 से अधिक दवाओं के बैच गुणवत्ता मानकों (Not of Standard Quality – NSQ) पर खरे नहीं उतरे और फेल पाए गए हैं। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि कई नामी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों के नाम पर नकली, मिलावटी और गैर-मानक दवाइयां बनाकर खुले बाजार में खपाई जा रही थीं।
नामी ब्रांड्स के नाम का दुरुपयोग: नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क
सीडीएससीओ की रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दायरे में आई कई दवाओं पर जाने-माने फार्मास्यूटिकल ब्रांड्स के लेबल लगे हुए थे। हालांकि, जब संबंधित मूल निर्माता कंपनियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि पकड़े गए बैच उनके द्वारा निर्मित नहीं किए गए हैं।
इसका सीधा अर्थ है कि संगठित रैकेट द्वारा नामी फार्मा कंपनियों की ब्रांड इमेज और पैकेजिंग की हूबहू नकल करके नकली दवाएं बाजार में बेची जा रही थीं। इन नकली और घटिया दवाओं में सक्रिय औषधीय घटक (Active Pharmaceutical Ingredient – API) या तो पूरी तरह नदारद थे या उनकी मात्रा बेहद कम थी।
किन सामान्य और गंभीर बीमारियों की दवाओं के सैंपल हुए फेल?
फेल हुए 280 नमूनों में दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक, एंटीबायोटिक्स, एंटी-एलर्जिक और क्रोनिक बीमारियों की दवाएं शामिल हैं:
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एंटीबायोटिक्स और एंटी-इन्फेक्टिव: बैक्टीरियल इन्फेक्शन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सिप्रोफ्लोक्सासिन (Ciprofloxacin), एमोक्सीसिलिन (Amoxicillin) और सेफिक्सिम (Cefixime) के कई बैच गुणवत्ता जांच में फेल हो गए।
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दर्द निवारक और बुखार की दवाएं: पैरासिटामोल (Paracetamol), डाइक्लोफेनाक और एस्पिरिन के संयोजन वाली गोलियां विघटन परीक्षण (Dissolution Test) और शुद्धता मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
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गैस्ट्रो और एसिडिटी की दवाएं: पैनटोप्राजोल (Pantoprazole), ओमेप्राजोल और एंटासिड सिरप के नमूनों में भी गंभीर कमियां पाई गईं।
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बीपी और डायबिटीज की दवाएं: उच्च रक्तचाप (Hypertension) और शुगर के नियंत्रण में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक दवाओं के सैंपल भी अमानक पाए गए, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
विघटन और शुद्धता जांच में सामने आई भारी लापरवाही
लैब विश्लेषण के दौरान पाया गया कि कई टैबलेट्स और कैप्सूल्स पेट में जाने के बाद तय समय सीमा के भीतर घुलने (Dissolve) में पूरी तरह विफल रहीं।
यदि कोई दवा शरीर में सही समय पर नहीं घुलती, तो उसका औषधीय असर मरीज के रक्त प्रवाह तक नहीं पहुंच पाता। इसके अलावा, कई लिक्विड सिरप और इंजेक्शन के नमूनों में पीएच (pH) का असंतुलन, बैक्टीरिया संदूषण (Bacterial Contamination) और अघुलनशील कण पाए गए।
दोषी निर्माताओं पर शिकंजा: नोटिस और रिकॉल के आदेश
सीडीएससीओ और राज्य औषधि नियामकों ने इस रिपोर्ट के बाद पूरे देश में सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। सभी राज्य ड्रग कंट्रोलर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे संबंधित फेल बैचों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाएं और बाजार से उन्हें तुरंत वापस (Recall) मंगाएं।
जिन संदिग्ध फैक्ट्रियों और सप्लायर्स द्वारा इन दवाओं का निर्माण या वितरण किया गया था, उनके खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (Drugs and Cosmetics Act) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और लाइसेंस रद्द करने व आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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