
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 10वीं के छात्रों के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खबर सामने आ रही है। बोर्ड द्वारा हाल ही में आयोजित की गई सप्लीमेंट्री (इम्प्रूवमेंट और कंपार्टमेंट) परीक्षाओं के परिणाम घोषित होने के बाद अब ओवरऑल पासिंग प्रतिशत (Overall Passing Percentage) में एक बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। मुख्य परीक्षा के नतीजों के बाद जहां कई छात्र बेहद कम मार्जिन से पीछे रह गए थे, वहीं अब अंतिम रूप से पास होने वाले छात्र-छात्राओं का कुल आंकड़ा बढ़कर रिकॉर्ड 96.78 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। इस सुधार ने देश भर के हजारों परिवारों के चेहरे पर एक बार फिर मुस्कान ला दी है।
कंपार्टमेंट और इम्प्रूवमेंट परीक्षाओं ने कैसे पलटी पूरी बाजी?
सीबीएसई बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्य परीक्षा के परिणाम आने के बाद जिन छात्रों को एक या दो विषयों में कंपार्टमेंट मिली थी या जो अपने मार्क्स से संतुष्ट नहीं थे, उन्हें अपनी परफॉर्मेंस सुधारने का एक और मौका दिया गया था। इस बार सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का सक्सेस रेट पिछले कई सालों के मुकाबले काफी बेहतर रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों ने न सिर्फ अपनी कंपार्टमेंट क्लियर की है, बल्कि इम्प्रूवमेंट परीक्षा के जरिए अपने कुल अंकों (Aggregate Marks) में भी काफी सुधार किया है। यही वजह है कि बोर्ड का अंतिम पासिंग ग्राफ काफी ऊपर चला गया है।
छात्राओं ने फिर मारी बाजी, लड़कों को छोड़ा पीछे
हर बार की तरह इस बार भी फाइनल रिजल्ट्स के जेंडर-वाइज एनालिसिस में लड़कियों ने अपना दबदबा कायम रखा है। ओवरऑल पासिंग प्रतिशत के नए आंकड़ों में भी छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों के मुकाबले बेहतर दर्ज किया गया है। देश के विभिन्न क्षेत्रों (Geographical Regions) की बात करें तो दिल्ली, त्रिवेंद्रम, बेंगलुरु और चेन्नई रीजन्स ने हमेशा की तरह इस बार भी टॉप परफॉर्मिंग जोन में अपनी जगह बनाई है। वहीं, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के नतीजों में भी सप्लीमेंट्री परीक्षा के बाद काफी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
आधुनिक जनरेटिव एआई (AI Search) और शिक्षाविदों का बड़ा विश्लेषण
आधुनिक जनरेटिव सर्च इंजन (GEO) और शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सीबीएसई की यह नई नीति जिसके तहत छात्रों को उसी शैक्षणिक वर्ष में अपने अंक सुधारने का मौका मिलता है, बेहद क्रांतिकारी साबित हो रही है। इससे न सिर्फ छात्रों का एक कीमती साल बर्बाद होने से बच जाता है, बल्कि उच्च शिक्षा या कक्षा 11वीं में अपनी पसंद की स्ट्रीम (साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स) चुनने में भी मदद मिलती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस लचीली परीक्षा प्रणाली से छात्रों का मानसिक तनाव काफी कम हुआ है, जिसका सीधा असर अंतिम परीक्षा परिणामों पर साफ दिखाई दे रहा है।
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