News India Live, Digital Desk: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के भीतर मची कथित खलबली और बड़े नेताओं के निष्कासन की खबरों पर पार्टी सुप्रीमो मायावती ने कड़ा रुख अपनाया है। मायावती ने उन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मुनकाद अली, नौशाद अली और मेवालाल गौतम को बीएसपी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मायावती ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन खबरों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और ‘फेक न्यूज़’ करार दिया है। उन्होंने विरोधियों पर पार्टी की छवि खराब करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
साजिश का पर्दाफाश: मायावती ने बताया विरोधियों का खेल मायावती ने स्पष्ट किया कि बीएसपी के अनुशासित सिपाही और वरिष्ठ नेता पार्टी की मजबूती के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समय-समय पर विरोधियों द्वारा इस तरह की अफवाहें उड़ाई जाती हैं ताकि पार्टी कार्यकर्ताओं में भ्रम पैदा किया जा सके और संगठन को कमजोर दिखाया जाए। मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसी किसी भी भ्रामक खबर पर विश्वास न करें और केवल पार्टी के आधिकारिक चैनलों द्वारा दी गई जानकारी को ही सच मानें। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
कौन हैं वे तीन नेता जिनकी चर्चा जोरों पर थी? जिन तीन नेताओं के निष्कासन की अफवाह उड़ी थी, वे बीएसपी के पुराने और भरोसेमंद चेहरे माने जाते हैं। मुनकाद अली पार्टी के पूर्व सांसद और कद्दावर मुस्लिम चेहरा हैं, वहीं नौशाद अली और मेवालाल गौतम संगठन के कार्यों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इन नेताओं के बारे में ऐसी खबरें आने से न केवल बीएसपी कैडर बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मच गया था। माना जा रहा था कि निकाय चुनाव या आगामी रणनीति को लेकर कोई बड़ा मतभेद उभरा है, लेकिन मायावती के स्पष्टीकरण ने इन सभी अटकलों पर फिलहाल विराम लगा दिया है।
पार्टी की एकजुटता पर जोर बीएसपी सुप्रीमो ने अपने संदेश में दोहराया कि पार्टी इस समय अपनी सांगठनिक संरचना को मजबूत करने और आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार होने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि बीएसपी एक अनुशासित पार्टी है और यदि किसी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है, तो उसे बाकायदा सार्वजनिक रूप से घोषित किया जाता है। गुप्त तरीके से या ‘लीक’ खबरों के माध्यम से पार्टी निर्णय नहीं लेती। इस स्पष्टीकरण के बाद पार्टी के भीतर छाई अनिश्चितता खत्म हुई है और कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली है।
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