
भारतीय संगीत जगत में लता मंगेशकर एक ऐसा नाम हैं जिनकी आवाज को सदियों तक याद रखा जाएगा। लेकिन बॉलीवुड के सुनहरे दौर में एक ऐसी गायिका भी थीं जिनकी आवाज में ठीक लता जी जैसी ही मिठास, ठहराव और रूहानियत थी। हम बात कर रहे हैं दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर की। सुमन कल्याणपुर को फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के बाद से ही ‘बॉलीवुड की दूसरी लता’ कहा जाने लगा था। हालांकि, यह उपमा उनकी काबिलियत की तारीफ तो थी, लेकिन उनके करियर के लिए यह एक बड़ा दंश भी बन गई। ताउम्र सुमन कल्याणपुर को लता मंगेशकर के साथ तुलना का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें वह पहचान और क्रेडिट नहीं मिल सका जिसकी वह हकदार थीं।
लता मंगेशकर की हमशक्ल आवाज और 10 गानों का वो बड़ा भ्रम
सुमन कल्याणपुर की आवाज लता जी से इस कदर मिलती-जुलती थी कि रेडियो के दौर में आम श्रोता तो क्या, बड़े-बड़े संगीत पारखी भी धोखा खा जाते थे। फिल्म जगत में ऐसे कम से कम 10 मशहूर गाने हैं जिन्हें आज भी लोग लता मंगेशकर का गाया हुआ मान लेते हैं, जबकि असल में उन्हें सुमन कल्याणपुर ने अपनी सुरीली आवाज से सजाया था। ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे…’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे…’, ‘बहना ने भाई की कलाई से…’, ‘तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो…’ और ‘दिल एक मंदिर है…’ जैसे सदाबहार गानों में सुमन कल्याणपुर की आवाज का जादू बिखरा हुआ है। इन गानों को सुनते वक्त आज भी दोनों गायिकाओं के बीच फर्क कर पाना लगभग नामुमकिन सा लगता है।
मोहम्मद रफी के साथ गाए 140 गाने और वो मशहूर विवाद
जब संगीत की दुनिया में लता मंगेशकर और महान गायक मोहम्मद रफी के बीच गानों की रॉयल्टी को लेकर एक लंबा विवाद चल रहा था, तब सुमन कल्याणपुर फिल्म मेकर्स के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी थीं। उस दौर में मोहम्मद रफी के साथ जोड़ी बनाने के लिए हर संगीतकार सुमन कल्याणपुर के पास जाता था। सुमन कल्याणपुर ने अपने करियर में मोहम्मद रफी के साथ करीब 140 युगल गीत (Duets) रिकॉर्ड किए। रफी साहब और सुमन कल्याणपुर की जुगलबंदी ने इंडस्ट्री को ‘ठहरे हुए पानी में कंकड़ न मार…’, ‘तुझे देखा तुझे चाहा तुझे पूजा…’, और ‘इतनी हसीन इतनी जवान रात…’ जैसे कई ब्लॉकबस्टर और रोमांटिक गाने दिए जो आज भी गुनगुनाए जाते हैं।
तुलना के दंश ने करियर में खड़ी की कई बड़ी मुश्किलें
एक जैसी आवाज होने का नुकसान सुमन कल्याणपुर को यह हुआ कि कई बार संगीतकार लता मंगेशकर के उपलब्ध न होने पर ही उन्हें रिप्लेसमेंट के तौर पर बुलाते थे। जब लता जी वापस आ जाती थीं, तो कई गाने सुमन जी के हाथ से निकल जाते थे। इस रिप्लेसमेंट टैग और लगातार होने वाली तुलना ने उनके करियर को काफी सीमित कर दिया। फिल्म इंडस्ट्री के कड़वे सच पर बात करते हुए कई संगीत समीक्षकों का मानना है कि सुमन कल्याणपुर को स्वतंत्र तौर पर एक महान गायिका के रूप में देखा जाना चाहिए था, न कि किसी की परछाई के रूप में। उन्होंने हर शैली के गानों को बेहद संजीदगी से गाया था।
आज भी फैंस के दिलों में अमर है इस दिग्गज गायिका का संगीत
तमाम बंदिशों और तुलनात्मक विवादों के बावजूद सुमन कल्याणपुर ने संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी एक बेहद खास और सम्मानित जगह बनाई। उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ‘पद्म भूषण’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। आज भले ही वह लाइमलाइट से दूर अपनी जिंदगी बिता रही हैं, लेकिन उनके गाए हुए भजन, गजलें और फिल्मी तराने आज भी उतने ही तरोताजा महसूस होते हैं। संगीत की दुनिया हमेशा सुमन कल्याणपुर को एक ऐसी फनकार के रूप में याद रखेगी जिसने लता मंगेशकर के महासाम्राज्य के बीच भी अपनी सुरीली कला से हर किसी को मंत्रमुग्ध किया।
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