यूपी सीएम युवा उद्यमी योजना में बड़ा बदलाव,अब ट्रेनिंग के बाद ही मिलेगा लोन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना’ को लेकर नियमों में बड़ा फेरबदल किया है। अब किसी भी युवा अभ्यर्थी को लोन की राशि सीधे खाते में नहीं मिलेगी, बल्कि ऑनलाइन प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) का प्रमाणपत्र बैंक को मिलने के बाद ही फंड जारी किया जाएगा। सरकार ने यह कदम लोन आवेदनों के बड़े पैमाने पर निरस्त होने और योजना में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया है।

लोन के लिए 30 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत, बैंक से लोन की सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद आवेदक को 30 घंटे का विशेष प्रशिक्षण सत्र पूरा करना होगा। यह ट्रेनिंग पांच दिनों में पूरी की जाएगी, जिसके लिए समाधान समिति, यूपीआईकान और उद्यमिता विकास संस्थान जैसे तीन प्रतिष्ठित संस्थानों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद प्रमाणपत्र सीधे बैंक को ऑनलाइन भेज दिया जाएगा, जिसके बाद बैंक लोन की राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर (डिस्बर्स) कर देगा।

फेस रिकग्निशन और एनसीवीटी पाठ्यक्रम से बढ़ेगी गुणवत्ता

योजना में किसी भी प्रकार की धांधली रोकने के लिए विभाग ने फेस रिकग्निशन (चेहरा पहचान) प्रणाली अपनाई है। यानी ट्रेनिंग के दौरान अभ्यर्थी की उपस्थिति चेहरे के मिलान से होगी।

  • विशेषज्ञों का मॉड्यूल: प्रशिक्षण का मॉड्यूल NCVT (नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग) के पाठ्यक्रम पर आधारित है।

  • लाइव सत्र: ट्रेनिंग के अंतिम दिन विशेषज्ञों के साथ लाइव सत्र होगा, जिसमें युवा उद्यमी अपने व्यवसाय से जुड़े तकनीकी सवाल पूछ सकेंगे।

  • पंजीकरण से पहले वीडियो: अब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने से पहले आवेदक को आधे घंटे का प्रारंभिक काउंसलिंग वीडियो देखना अनिवार्य होगा, ताकि वे अपने चुने हुए सेक्टर की बारीकियों को समझ सकें।

2.67 लाख आवेदनों के निरस्त होने पर एक्शन

आंकड़ों के मुताबिक, 28 अप्रैल तक योजना के तहत करीब 5.30 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से बैंकों ने 1.80 लाख आवेदनों को ही मंजूरी दी। लगभग 2.67 लाख आवेदन तकनीकी खामियों और प्रोजेक्ट रिपोर्ट की कमी के कारण निरस्त कर दिए गए। मिशन निदेशक वी. विजयेन्द्र पांडियन ने इन खामियों को दूर करने के लिए 1 मई से नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब विभाग खुद युवाओं को प्रोजेक्ट रिपोर्ट उपलब्ध करा रहा है।

कौशल विकास मिशन की बड़ी कार्रवाई: 400 कंपनियां ब्लैकलिस्ट

युवाओं को हुनरमंद बनाने के नाम पर लापरवाही बरतने वाली 400 प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों पर उप्र कौशल विकास मिशन ने गाज गिराई है। मिशन निदेशक पुलकित खरे की जांच में पाया गया कि इन कंपनियों के पास न तो मानक के अनुरूप लैब थी और न ही पर्याप्त संसाधन।

  • जियो टैगिंग से निगरानी: अब ‘कौशल दृष्टि पोर्टल’ के जरिए ट्रेनिंग की लाइव निगरानी की जा रही है।

  • फोटो अपलोड करना अनिवार्य: प्रशिक्षण दे रही कंपनियों को युवाओं की जियो-टैग फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

  • सत्र 2026-27 के लिए सख्ती: सरकार ने साफ कर दिया है कि मानकों से समझौता करने वाली कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाली 900 से अधिक कंपनियों को अतिरिक्त लक्ष्य (टॉपअप) दिया जाएगा।