
पटना: बिहार की सियासत में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा। राजधानी के गांधी मैदान में हुए भव्य समारोह में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार संपन्न हुआ। इस विस्तार में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार का रहा। लंबे समय तक राजनीति की चकाचौंध से दूर रहने वाले निशांत ने न केवल मंत्री पद की शपथ ली, बल्कि बिहार की भावी राजनीति के ‘नए उत्तराधिकारी’ के रूप में अपनी धमक भी दर्ज कराई है।
निशांत कुमार को मिला ‘स्वास्थ्य’ का जिम्मा
कैबिनेट विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे में निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनसे पहले यह विभाग भाजपा के कद्दावर नेता मंगल पांडेय के पास था, जिन्हें इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि निशांत को यह महत्वपूर्ण विभाग देकर जेडीयू और भाजपा ने भविष्य की एक बड़ी रणनीति तैयार की है।
सीएम सम्राट चौधरी और निशांत की ‘केमिस्ट्री’
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और निशांत कुमार के बीच बेहतरीन केमिस्ट्री देखने को मिली। जानकारों का मानना है कि बिहार में ‘लव-कुश’ समीकरण (कुर्मी और कोइरी) को और अधिक मजबूत करने के लिए यह एक सोची-समझी चाल है। सम्राट चौधरी जहां कोइरी समाज के बड़े चेहरे हैं, वहीं निशांत कुमार अब कुर्मी समाज के नए ‘युवा चेहरे’ के रूप में उभरे हैं। दोनों की जुगलबंदी एनडीए के वोट बैंक को नया आधार दे सकती है।
भविष्य का प्लान: क्या होगा अगला कदम?
अभी तक राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार ने हाल ही में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जाहिर की थी। हालांकि वे फिलहाल किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं, इसलिए संवैधानिक नियमों के मुताबिक उन्हें अगले 6 महीने के भीतर सदस्यता लेनी होगी। चर्चा है कि जेडीयू उन्हें विधान परिषद (MLC) के जरिए सदन में भेज सकती है। निशांत ने संकेत दिए हैं कि उनका ध्यान फिलहाल संगठन को मजबूत करने और राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर होगा।
राजनीति के अखाड़े में ‘सॉफ्ट स्पोकन’ निशांत
निशांत कुमार की छवि एक बेहद शांत और सरल व्यक्ति की रही है। 50 वर्षीय निशांत पेशे से इंजीनियर हैं और अब तक अपने पिता की छाया से दूर रहे हैं। लेकिन अब उनकी औपचारिक एंट्री ने यह साफ कर दिया है कि जेडीयू में ‘पोस्ट-नीतीश’ युग की तैयारी शुरू हो चुकी है। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने कहा कि वे राज्य की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं और अपने पिता के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाएंगे।
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