
क्या आपने कभी सोचा है कि आपके पेट पर जमी फालतू चर्बी (Belly Fat) का असर सिर्फ आपके दिल या डायबिटीज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे आपके दिमाग की सेहत और याददाश्त पर भारी पड़ रहा है? हैदराबाद के जाने-माने अपोलो अस्पताल के प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि कैसे शरीर में विसरल फैट (Visceral Fat) का बढ़ना डिमेंशिया (Dementia), सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट और दिमाग का आकार (Brain Volume) कम होने का एक बड़ा कारण बन सकता है। अमूमन लोग वजन बढ़ने को सिर्फ शारीरिक बनावट से जोड़कर देखते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस के लिहाज से पेट के अंदरूनी अंगों को घेरने वाला यह खतरनाक फैट आपके ब्रेन हेल्थ के लिए एक शांत हत्यारे (Silent Killer) की तरह काम कर रहा है।
सबक्यूटेनियस फैट से कितना अलग और खतरनाक है ‘विसरल फैट’?
अक्सर लोग शरीर पर दिखने वाले सामान्य वजन या स्किन के नीचे जमा होने वाले फैट (सबक्यूटेनियस फैट) को लेकर परेशान रहते हैं, लेकिन न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक असली खतरा पेट के भीतर अंगों के आसपास जमा होने वाले ‘विसरल एडीपोज़ टिशू’ यानी विसरल फैट से होता है। डॉ. सुधीर कुमार के अनुसार, जिन लोगों के शरीर में इस खतरनाक फैट का स्तर ज्यादा होता है, उनमें कॉग्निटिव डिक्लाइन (संज्ञानात्मक गिरावट), डिमेंशिया, और दिमाग के उस हिस्से (हिप्पोकैम्पस) का आकार छोटा होने का खतरा काफी बढ़ जाता है जो हमारी याददाश्त को सुरक्षित रखने के लिए जिम्मेदार होता है। यह अंदरूनी चर्बी शरीर के भीतर क्रॉनिक लो-ग्रेड इन्फ्लेमेशन (सूजन), इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर धीरे-धीरे दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है।
याददाश्त और फोकस पर ऐसे डालता है बुरा असर
बढ़ता हुआ पेट सिर्फ बुढ़ापे में नहीं, बल्कि उससे कई साल पहले ही आपके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालना शुरू कर देता है। स्टडीज से यह बात सामने आई है कि अत्यधिक विसरल फैट के कारण एग्जीक्यूटिव फंक्शन में कमी, जानकारी को प्रोसेस करने में देरी, ध्यान भटकना और मेमोरी परफॉर्मेंस कमजोर होने जैसी समस्याएं समय से पहले ही घेरने लगती हैं। डॉ. सुधीर का कहना है कि यह गिरावट इतनी खामोशी से आती है कि शुरुआत में इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, लेकिन समय रहते अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का रूप ले सकती है। खासकर जिन लोगों को पहले से ही डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर या फैटी लिवर की समस्या है, उनके लिए विसरल फैट को कंट्रोल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
लाइफस्टाइल में इन आसान बदलावों से करें विसरल फैट कम
अच्छी खबर यह है कि उम्र या जेनेटिक कारणों के उलट विसरल फैट को पूरी तरह से कंट्रोल और कम किया जा सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट ने इसे कम करने के लिए कुछ बेहद असरदार और विज्ञान समर्थित उपाय सुझाए हैं:
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नियमित एरोबिक एक्सरसाइज: कार्डियो या एरोबिक वर्कआउट को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं।
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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हफ्ते में कम से कम दो बार वजन उठाने या मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज जरूर करें।
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हेल्दी डाइट: मेडिटेरेनियन-स्टाइल डाइट अपनाएं जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और फाइबर शामिल हो।
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पूरी नींद लें: हर रात 7 से 9 घंटे की गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना ब्रेन हेल्थ के लिए अनिवार्य है।
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वजन के बजाय कमर के नाप पर दें ध्यान: केवल बॉडी वेट मशीन पर निर्भर रहने के बजाय अपनी कमर के घेरे पर नजर रखें। विशेषज्ञों के अनुसार, कमर-से-ऊंचाई का अनुपात 0.5 से कम होना एक स्वस्थ शरीर का पैमाना है।
डॉ. सुधीर की सलाह है कि बाजार में मिलने वाले महंगे ‘फैट-बर्निंग सप्लीमेंट्स’ के चक्कर में पड़ने के बजाय नेचुरल तरीकों पर भरोसा करें। अपने दिमाग को लंबे समय तक तेज, जवां और स्वस्थ रखने के लिए विसरल फैट को कम करना आपके भविष्य के लिए सबसे बेहतरीन लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट है, क्योंकि एक फिट कमर ही एक हेल्दी ब्रेन की गारंटी देती है।
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