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BAMS डॉक्टर से IRS कमिश्नर तक: अल्मोड़ा की बेटी श्रद्धा जोशी का संघर्ष और सफलता का सफर

भारतीय सिनेमा के पर्दे पर जब IPS मनोज कुमार शर्मा (Manoj Kumar Sharma) की संघर्ष गाथा ’12th Fail’ फिल्म के जरिए लोगों के सामने आई, तो हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर बैठा। असफलता से लड़कर शिखर तक पहुंचने की इस कहानी ने लाखों युवाओं को प्रेरित किया। लेकिन इस पूरी कहानी का एक ऐसा भी पहलू रहा है, जो पर्दे के पीछे रहकर इस सफर की सबसे बड़ी ताकत बना। वह नाम है श्रद्धा जोशी शर्मा (Shraddha Joshi Sharma) का, जो न केवल मनोज शर्मा की जीवनसंगिनी हैं, बल्कि खुद डॉक्टर से लेकर IRS कमिश्नर बनने तक का एक straordinay (असाधारण) और प्रेरणादायक सफर तय कर चुकी हैं।

उत्तराखंड के पहाड़ों की गोद से निकलकर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचने वाली श्रद्धा जोशी का यह सफर आसान नहीं था, बल्कि यह दृढ़ संकल्प, अटूट विश्वास और संघर्ष की एक ऐसी मिसाल है जो आज देश की हर बेटी के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में 5 मार्च 1979 को जन्मी श्रद्धा जोशी बचपन से ही पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 12वीं की बोर्ड परीक्षा में स्टेट मेरिट में 13वीं रैंक हासिल की थी।

श्रद्धा के माता-पिता दोनों पेशे से डॉक्टर थे। माता-पिता की इच्छा थी कि उनकी बेटी भी डॉक्टर बने, इसलिए उनके सपनों का सम्मान करते हुए श्रद्धा ने हाईस्कूल के बाद हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी से आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) की डिग्री हासिल की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के एक अस्पताल में डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं देना शुरू कर दिया। अस्पताल में मरीजों का इलाज करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि उनका वास्तविक लक्ष्य और झुकाव सिविल सर्विसेज की ओर है, जिसके बाद उन्होंने अपने जीवन का रुख बदलने का फैसला किया।

अपने सिविल सेवा के सपने को साकार करने के लिए श्रद्धा दिल्ली के प्रसिद्ध छात्र केंद्र मुखर्जी नगर आ गईं। यहीं एक यूपीएससी कोचिंग सेंटर के दौरान उनकी मुलाकात मनोज कुमार शर्मा से हुई। साहित्य में श्रद्धा की गहरी रुचि को देखते हुए एक शिक्षक ने दोनों का परिचय कराया था।

जब श्रद्धा को यह बात पता चली कि 12वीं कक्षा में कई विषयों में फेल होने के बावजूद मनोज ने बिना किसी कोचिंग के अपने दम पर यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा पास कर ली है, तो वह उनके बुलंद हौसले और आत्मविश्वास से बहुत प्रभावित हुईं। उस दौर में जब मनोज के पास आर्थिक रूप से कुछ नहीं था और वह कड़ा संघर्ष कर रहे थे, तब श्रद्धा एक चट्टान की तरह उनके साथ खड़ी रहीं। एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद श्रद्धा ने मनोज की कठिन परिस्थितियों से खुद को कभी अलग नहीं समझा। जब मनोज लगातार तीन बार यूपीएससी में असफल रहे, तब भी श्रद्धा ने न केवल खुद अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि मनोज का मनोबल कभी टूटने नहीं दिया।

अपनी मेहनत और लगन के बल पर साल 2005 में PCS (Provincial Civil Services) की परीक्षा पास करके श्रद्धा जोशी ने उत्तराखंड में डिप्टी कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाला। लेकिन वह यहीं नहीं रुकीं। अपने पति मनोज शर्मा के साथ और सहयोग से उन्होंने साल 2007 में पुनः यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में भाग लिया और अखिल भारतीय स्तर पर 12वीं रैंक (AIR 121) हासिल कर इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) में चुनी गईं।

साल 2007 से लेकर अब तक श्रद्धा जोशी ने केंद्र और राज्य सरकारों के कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं:

  • शुरुआती IRS करियर: सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) में डिप्टी कमिश्नर के रूप में कार्य।

  • वर्ष 2018: महाराष्ट्र सरकार के अंतर्गत महिला आर्थिक विकास महामंडल (MAVIM) में प्रबंध निदेशक (MD) की जिम्मेदारी।

  • वर्ष 2022: महाराष्ट्र टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MTDC), मुंबई में प्रबंध निदेशक का पद संभाला।

  • वर्ष 2025 से वर्तमान: मुंबई कस्टम्स विभाग में कस्टम्स कमिश्नर (ऑडिट कमिश्नरेट, जोन 1) के रूप में कार्यरत हैं और साथ ही प्रिंसिपल कमिश्नर (जनरल) का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रही हैं।

एक इंटरव्यू के दौरान मनोज शर्मा और श्रद्धा जोशी ने अपनी शादी से जुड़े कुछ बेहद दिलचस्प और मजेदार किस्से भी साझा किए थे। मनोज शर्मा ने मजाकिया लहजे में बताया था कि श्रद्धा की पूरी ऊर्जा चाय पर टिकी रहती है, और कहा था कि, “एक पहाड़ी इंसान को सोते समय भी चाय चाहिए और उठते समय भी।”

वहीं, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रद्धा ने हंसते हुए बताया था, “मैं उत्तराखंड की शांत वादियों से आती हूँ जहाँ लोगों ने शायद ही कभी असल जिंदगी में बंदूकें देखी हों। इसके विपरीत, मनोज चंबल से ताल्लुक रखते हैं। हमारी शादी का मंजर यह था कि आसपास लोग दोनाली बंदूकें लेकर घूम रहे थे और हवा में गोलियां चल रही थीं।”

IRS श्रद्धा जोशी की यह जीवन यात्रा इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि एक मजबूत इच्छाशक्ति वाली महिला न केवल अपनी मेहनत के दम पर सफलता के शिखर को छू सकती है, बल्कि अपने जीवनसाथी की ढाल बनकर उसे भी फर्श से अर्श तक पहुंचा सकती है। उनकी यह कहानी आज के युवाओं को यह सिखाती है कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानकर लगातार आगे बढ़ते रहना ही सच्ची सफलता है।