
अयोध्या के भव्य और ऐतिहासिक राम मंदिर (Ram Mandir, Ayodhya) परिसर में हाल ही में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी के मामले ने देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों को गहरा आघात पहुँचाया है। इस घटना से उपजे दुख और मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को ठेस पहुँचने के बाद, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust) ने एक बड़ा कदम उठाया है।
मंदिर की पवित्रता, मर्यादा और दिव्य ऊर्जा की पुनर्स्थापना के लिए परिसर में 10 दिवसीय विशेष प्रायश्चित एवं शुद्धिकरण अनुष्ठान शुरू कर दिया गया है। सनातन धर्म की प्राचीन आस्था और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप, यह अनुष्ठान भगवान श्रीराम से क्षमा-याचना करने और भविष्य में ऐसी किसी भी अनुचित घटना की पुनरावृत्ति न होने देने के कड़े संकल्प का प्रतीक है।
70 वैदिक आचार्यों की देखरेख में चल रहा है महा-अनुष्ठान
राम मंदिर के इतिहास में शुचिता को बनाए रखने के लिए आयोजित यह अनुष्ठान बेहद बड़े स्तर पर किया जा रहा है:
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परिसर का शुद्धिकरण: मंदिर के मुख्य गर्भगृह (Sanctum Sanctorum), विशाल परकोटा और परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों पर एक साथ शुद्धिकरण की प्रक्रिया चल रही है।
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वैदिक आचार्यों की टोली: देश के कोने-कोने से आए कुल 70 प्रकांड वैदिक आचार्य इस पूरे 10 दिवसीय अनुष्ठान को संपन्न करा रहे हैं।
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धार्मिक पद्धतियां: शुद्धिकरण के लिए लगातार वैदिक मंत्रोच्चार, महादेव का विशेष रुद्राभिषेक, पवित्र हवन-यज्ञ, रामार्चन पूजा और अन्य शास्त्रोक्त धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
धार्मिक मान्यता क्या कहती है?:
हिंदू शास्त्रों और सनातन परंपरा के अनुसार, यदि किसी जाग्रत देवस्थान या मंदिर परिसर में चोरी, अपवित्रता अथवा किसी भी प्रकार की अनैतिक व अनुचित घटना घटित होती है, तो वहां दोष-परिमार्जन (दोष दूर करने) के लिए प्रायश्चित अनुष्ठान करना अनिवार्य माना जाता है। इससे मंदिर की आध्यात्मिक शक्ति और मर्यादा अक्षुण्ण बनी रहती है।
सुरक्षा के लिए मंदिर में लागू हुईं नई कड़ी व्यवस्थाएं
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने केवल धार्मिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक और प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं:
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महंत गोविंद देव गिरि का बयान: ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि ने इस मामले पर स्पष्ट रूप से कहा कि, “किसी भी भूल का सबसे बड़ा और वास्तविक प्रायश्चित यह है कि उसकी पुनरावृत्ति न होने दी जाए यानी वह घटना भविष्य में दोबारा कभी न हो।”
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अभेद्य सुरक्षा चक्र: ट्रस्ट ने मंदिर में आने वाले चढ़ावे, दान-पात्रों (Hundi) की सुरक्षा और पूरी डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़, डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू कर दी हैं, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो सके।
महंत गोविंद देव गिरि खुद कर रहे हैं व्यक्तिगत साधना
महंत गोविंद देव गिरि ने इस घटना पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि वह स्वयं भी व्यक्तिगत स्तर पर इस भूल का प्रायश्चित कर रहे हैं। इसके तहत वह प्रतिदिन विशेष नाम-जप, स्तोत्र पाठ और कठिन धार्मिक साधना का पालन कर रहे हैं। उनका मानना है कि जिस पावन भूमि पर स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम बाल रूप में विराजमान हैं, वहां ऐसी घटना होना अत्यंत हृदयविदारक है, इसलिए दोषमुक्ति और मंदिर की आध्यात्मिक शुचिता वापस लाना ट्रस्ट की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
राम मंदिर केवल पत्थरों से निर्मित एक भव्य इमारत नहीं, बल्कि दुनिया भर के सनातनी हिंदुओं की अगाध श्रद्धा और प्राणों का केंद्र है। इसी सर्वोच्च भावना को ध्यान में रखकर ट्रस्ट इस प्रायश्चित अनुष्ठान के जरिए करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे को और मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
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