
अयोध्या में करोड़ों राम भक्तों की आस्था के सबसे बड़े केंद्र प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले ने अब एक नया और बेहद सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। इस पूरे घोटाले की गहराई से जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मंदिर के दानपात्र से नकदी गायब होना कोई एक-दो बार की सामान्य घटना नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह लंबे समय से बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी जा रही एक बड़ी साजिश थी। इस बड़ी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपनी आपातकालीन बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के आधिकारिक इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं।
एसआईटी का दावा: 45 दिनों की सीसीटीवी फुटेज में 70 बार दिखी चोरी
जांच एजेंसी (SIT) ने मंदिर परिसर के भीतर लगे कैमरों की लगभग 45 दिनों की व्यापक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को बारीकी से खंगाला है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के दौरान सुरक्षा जांच और काउंटिंग रूम के कर्मचारियों की निगरानी में भयंकर लापरवाही और ढील पाई गई। फुटेज के आधार पर जांच टीम का दावा है कि कुछ मुख्य आरोपी मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय लाखों की नकदी बड़ी चालाकी से अपने कपड़ों में छिपाकर ले जाते थे। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि इस औचक जांच से ठीक पहले कुछ संदिग्ध कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये की नकदी पहले ही बरामद की जा चुकी थी। इसके अलावा, 4 जून को काउंटिंग सेंटर से जुड़े एक वाशरूम से भी लावारिस हालत में करीब 2.25 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे।
डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर उठे सवाल, SOP का नहीं हुआ पालन
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और उनकी भूमिका पर भी गंभीर उंगलियां उठाई गई हैं। जांच के मुताबिक, जब 20 सितंबर 2024 को उन्हें दान प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की कमान सौंपी गई थी, तब उनके कार्यकाल के दौरान दान की गिनती के लिए बनाए गए कड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं कराया गया। उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर अपनी पसंद के लोगों की नियुक्तियां कीं और सुभाष श्रीवास्तव को सीधे काउंटिंग सेंटर का नया प्रभारी नियुक्त कर दिया, जिससे पूरी निगरानी व्यवस्था ध्वस्त हो गई।
मुख्य आरोपी टिन्नू यादव बिना अनुमति संभाल रहा था हुंडियों की चाबियां
रिपोर्ट में इस पूरे रैकेट के मुख्य सूत्रधार और प्रमुख आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को लेकर भी कई बड़े खुलासे किए गए हैं। एसआईटी के अनुसार, टिन्नू यादव बिना किसी लिखित आधिकारिक अनुमति या आदेश के ही मुख्य दान पेटियों (हुंडियों) की चाबियां अपने पास रखता था और जब चाहे उसकी पहुंच संभाल रहा था। इतना ही नहीं, टिन्नू यादव की विशेष सिफारिश और प्रभाव के चलते ही मनीष कुमार यादव नाम के एक अन्य संदिग्ध व्यक्ति को भी दान राशि के मुख्य गिनती कक्ष में बिना उचित वेरिफिकेशन के तैनात किया गया था।
दैनिक रूप से गायब हो रही थी नकदी, 22 जुलाई को आएगी फाइनल रिपोर्ट
सीसीटीवी कैमरों के गहन विश्लेषण के बाद एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि 45 दिनों के भीतर कम से कम 70 बार से ज्यादा बार छोटी-बड़ी चोरियों को अंजाम दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह अवैध सिलसिला संभवतः अप्रैल या मई 2025 के आसपास से ही धड़ल्ले से शुरू हो चुका था और इस वर्ष 5 जून को मामला खुलने तक लगातार जारी रहा। जांच एजेंसी का मानना है कि इस पूरी समय अवधि के दौरान लगभग हर दिन किसी न किसी रूप में चढ़ावे की नकदी में भारी हेराफेरी की गई।
चंपत राय बाहर, कृष्ण मोहन बने अंतरिम महासचिव; बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी
एसआईटी की यह विस्तृत रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सामने आने से कुछ घंटे पहले ही राम मंदिर ट्रस्ट की करीब तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक समाप्त हुई। इस बैठक में ट्रस्ट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के पदों से इस्तीफे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिए हैं। वर्तमान संकट को देखते हुए ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को नया अंतरिम महासचिव नियुक्त किया है। इसके साथ ही मंदिर प्रशासन को सुचारू रूप से चलाने और एक नए पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस विशेष समिति में देश के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और वरिष्ठ ट्रस्टी सुरेश हावरे को शामिल किया गया है।
ट्रस्ट ने कहा- घटना से दुखी हैं, लेकिन सभी 2,926 गैर-नकद चढ़ावे पूरी तरह सुरक्षित
बैठक के समापन के बाद ट्रस्ट ने देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के नाम एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया। ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर की दान राशि से जुड़ी इस कथित अनियमितता और चोरी की घटना से पूरे संगठन को गहरा आघात लगा है और वे इससे बेहद दुखी हैं। हालांकि, ट्रस्ट ने देश-विदेश के रामभक्तों को आश्वस्त करते हुए साफ किया है कि भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सभी 2,926 गैर-नकद चढ़ावे (सोना, चांदी, कीमती आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं) पूरी तरह से सुरक्षित लॉकर में हैं और उनका एक-एक रिकॉर्ड पारदर्शी है। ट्रस्ट ने यह भी सूचित किया कि आगामी 22 जुलाई को उनकी अगली बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें एसआईटी की फाइनल क्लोजर रिपोर्ट पर विस्तृत कानूनी कार्रवाई की जाएगी और नए अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्तियों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
girls globe