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Asian Market Today: लगातार छठे दिन चमके एशियाई शेयर बाजार, टेक शेयरों में बंपर तेजी और कच्चे तेल में गिरावट से मिला जोरदार सपोर्ट

वैश्विक सकारात्मक संकेतों और टेक शेयरों में आई जोरदार खरीदारी के दम पर एशियाई शेयर बाजारों में बुधवार को लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी का माहौल देखा गया। अमेरिकी बाजार वॉल स्ट्रीट, विशेष रूप से टेक-प्रधान नैस्डैक (Nasdaq 100) के रिकॉर्ड स्तर छूने का सीधा फायदा एशियाई इक्विटी बेंचमार्क को मिला है।

निवेशकों की धारणा को सबसे ज्यादा मजबूती वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई लगातार गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से मिली है। ऊर्जा लागत कम होने से मुद्रास्फीति (महंगाई) के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों (Risk-on Assets) में संस्थागत निवेशकों की लिवाली लौटती नजर आ रही है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख शेयर बाजारों ने सुबह के सत्र में मजबूत शुरुआत की और बढ़त को बनाए रखा:

  • जापान (Nikkei 225): टोक्यो का प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 करीब 1.38% की शानदार छलांग लगाकर मजबूत स्तर पर कारोबार कर रहा है। ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में चौतरफा खरीदारी देखी गई।

  • दक्षिण कोरिया (KOSPI): सियोल का कोस्पी इंडेक्स 1.15% उछल गया। चिपमेकर दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स के शेयरों में आई मजबूती ने इंडेक्स को रफ्तार दी।

  • ऑस्ट्रेलिया (S&P/ASX 200): ऑस्ट्रेलियाई बाजार में भी 0.24% की सकारात्मक बढ़त दर्ज की गई, जहां माइनिंग और बैंकिंग शेयरों ने इंडेक्स को सहारा दिया।

  • चीन और हांगकांग: हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स और शंघाई कंपोजिट इंडेक्स सीमित दायरे में हरे निशान के साथ स्थिर बने रहे।

एशियाई इक्विटी बाजारों का यह संयुक्त प्रदर्शन बीते कई हफ्तों की सबसे लंबी विजयी रैली में से एक बन गया है।

इस मौजूदा तेजी की धुरी टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर तकनीकी कंपनियों द्वारा पूंजीगत व्यय (Capex) बढ़ाए जाने की खबरों ने टेक स्टॉक्स में दोबारा जान फूंक दी है।

अमेरिकी शेयर बाजार में एएमडी (AMD), इंटेल, मेटा और आर्म होल्डिंग्स जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में आए दोहरे अंकों के उछाल ने दुनिया भर के तकनीकी शेयरों का माहौल बदल दिया है। इसका सीधा सकारात्मक असर ताइवान सेमीकंडक्टर (TSMC), सैमसंग और टोक्यो इलेक्ट्रॉन जैसी एशियाई चिप कंपनियों पर देखने को मिला है। इन कंपनियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की आक्रामक खरीदारी ने पूरे एशियाई बेंचमार्क को ऊपर खींचने का काम किया है।

एशियाई बाजारों के लिए दूसरा सबसे बड़ा गेमचेंजर कच्चा तेल साबित हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगातार छठे सत्र में फिसलकर $98 प्रति बैरल के स्तर के आसपास पहुंच गया है, जो इसकी लंबी गिरावट का दौर दर्शाता है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी गिरकर $90 के दायरे में आ चुका है।

कच्चे तेल में नरमी के दो मुख्य कारण सामने आए हैं:

  1. सप्लाई में सुधार की उम्मीद: प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन और पाइपलाइन नेटवर्क को फिर से सुचारू रूप से शुरू करने के संकेत मिले हैं।

  2. राजनयिक बातचीत में प्रगति: मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) स्तर पर कूटनीतिक वार्ताओं में प्रगति की खबरों से आपूर्ति बाधित होने का जोखिम कम हुआ है।

चूंकि भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करते हैं, इसलिए क्रूड का सस्ता होना चालू खाता घाटे (CAD) और मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने में सीधा मददगार साबित होता है।

एशियाई बाजारों की लगातार छठे दिन की तेजी और कच्चे तेल की सुस्ती भारतीय घरेलू शेयर बाजार (Sensex और Nifty) के लिए भी काफी उत्साहजनक है। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) के शुरुआती रुझान भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों के लिए एक सकारात्मक और गैप-अप ओपनिंग का संकेत दे रहे हैं।

भारतीय बाजारों के प्रमुख सेक्टर्स पर संभावित प्रभाव:

  • पेंट, एविएशन और टायर कंपनियां: कच्चा तेल गिरने से इन कंपनियों की इनपुट लागत घटती है, जिससे एशियन पेंट्स, इंडिगो और एमआरएफ जैसे शेयरों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

  • आईटी सेक्टर (IT Stocks): अमेरिकी नैस्डैक की तेजी के बाद टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसे घरेलू आईटी शेयरों में शॉर्ट कवरिंग देखने को मिल सकती है।

  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs): इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के रिफाइनिंग व मार्केटिंग मार्जिन में स्थिरता आने का अनुमान है।

भले ही बाजार में लगातार तेजी का रुझान बना हुआ है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit Booking) की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। आगे आने वाले दिनों में बाजारों की दिशा तय करने में ये कारक निर्णायक होंगे:

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंकों के नीति निर्माताओं के बयानों और ब्याज दरों में कटौती की गति पर नजरें टिकी रहेंगी।

  • डॉलर इंडेक्स और यूएस 10-ईयर यील्ड: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5% के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बना रहना उभरते बाजारों के लिए पूंजी प्रवाह बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

  • कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजे: दूसरी तिमाही (Q2) के वित्तीय परिणाम आने वाले हफ्तों में सेक्टर-वार चाल तय करेंगे।