
वैश्विक स्तर पर जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध व तनाव का माहौल चरम पर है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय सुरक्षा को लेकर एक और बेहद चौंकाने वाला फैसला ले लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका अपने मॉडल सहयोगी देश पोलैंड में 5,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती करने जा रहा है।
ट्रंप ने यह बड़ी घोषणा पोलैंड के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति करोल नवरोकी (Karol Nawrocki) को चुनाव जीतने पर बधाई देने और उनके प्रति अपना पूर्ण समर्थन जताने के तुरंत बाद की है। ट्रंप के इस एकतरफा और अचानक लिए गए फैसले से न केवल पोलैंड के पड़ोसी देश बल्कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के शीर्ष अधिकारी भी पूरी तरह हैरान रह गए हैं।
बिना चर्चा के एलान: हैरान-परेशान हुए नाटो (NATO) अधिकारी
राष्ट्रपति ट्रंप के इस औचक फैसले के बाद नाटो के भीतर खलबली मच गई है। नाटो के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने मीडिया से बात करते हुए अपनी हैरानी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नाटो इस फैसले से पूरी तरह से स्तब्ध है क्योंकि पूर्व में अमेरिका ने पोलैंड में 4,000 सैनिकों की तैनाती का रणनीतिक फैसला लिया था, लेकिन अब ट्रंप ने बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे 5,000 और सैनिक भेजने का एलान कर दिया है।
नाटो अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वॉशिंगटन (अमेरिका) ने इतनी बड़ी सैन्य घोषणा करने से पहले नाटो संगठन या अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ किसी भी स्तर पर चर्चा या विमर्श करना जरूरी नहीं समझा।
पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल का आधिकारिक बयान
इस हाई-प्रोफाइल सैन्य घोषणा के बाद पैदा हुए संशय को दूर करते हुए पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ ने यूरोप को आवंटित की गई ब्रिगेड कॉम्बैट टीम्स (BCTs) की कुल संख्या को चार से घटाकर तीन कर दिया है। इस रणनीतिक बदलाव के साथ ही अमेरिका अब साल 2021 में यूरोप में मौजूद बीसीटी (BCT) के स्तर पर वापस आ गया है।
प्रवक्ता के मुताबिक, यह फैसला यूरोप में अमेरिकी बलों की स्थिति और उपयोगिता पर ध्यान केंद्रित करने वाली एक बड़ी, दीर्घकालिक और कई स्तरों (Layers) वाली समीक्षा प्रक्रिया का नतीजा है। इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण पोलैंड में अमेरिकी सेना की अंतिम तैनाती में कुछ समय के लिए देरी हो रही है, लेकिन अमेरिका पोलैंड को अपना एक ‘मॉडल सहयोगी’ मानता है और प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगा।
क्या है ट्रंप का “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा और सैन्य रणनीति?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे फैसले के पीछे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रसिद्ध “अमेरिका फर्स्ट” (America First) एजेंडा काम कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग आने वाले दिनों में यूरोप के भीतर अपनी और अन्य अमेरिकी सेनाओं की अंतिम और स्थायी तैनाती की रूपरेखा तय करेगा। यह पूरा खाका अमेरिका की खुद की रणनीतिक और सैन्य जरूरतों के गहन विश्लेषण के आधार पर तैयार किया जाएगा।
इस रणनीति का एक और सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिका अब यह बारीकी से देखेगा कि यूरोप के अमीर सहयोगी देश (जैसे जर्मनी, फ्रांस आदि) अपनी और अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अपनी सेनाओं व बजट से कितना योगदान दे रहे हैं। ट्रंप सरकार का मुख्य एजेंडा नाटो के सहयोगी देशों को इस बात के लिए प्रोत्साहित और सक्षम बनाना है कि वे केवल अमेरिका के भरोसे न रहें, बल्कि यूरोप की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी खुद अपने कंधों पर उठाएं। पोलैंड के नए राष्ट्रपति करोल नवरोकी के साथ मिलकर ट्रंप इस नई नीति को यूरोप में तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।
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