
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य तनाव एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘एक्सियोस’ (Axios) की एक विस्फोटक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच जारी शांति समझौते की अंतिम दौर की बातचीत अगर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ नए और बड़े सैन्य हमले शुरू करने पर “गंभीरता से विचार” कर रहे हैं। इस महायुद्ध के खतरे को टालने और कूटनीतिक रास्ता निकालने के लिए बैक-चैनल डिप्लोमेसी तेज हो गई है, जिसके तहत पाकिस्तानी सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर भी कतर के एक हाई-लेवल प्रतिनिधिमंडल के साथ अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच चुके हैं।
व्हाइट हाउस में ‘वॉर कैबिनेट’ की बैठक: ट्रंप ने बुलाई राष्ट्रीय सुरक्षा टीम
‘एक्सियोस’ ने दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध और रणनीति को लेकर शुक्रवार सुबह व्हाइट हाउस में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बेहद गोपनीय और उच्च-स्तरीय बैठक की। राष्ट्रपति से सीधे जुड़े सूत्रों का कहना है कि ट्रंप इस बात को लेकर बेहद स्पष्ट हैं कि यदि मौजूदा वार्ता में आखिरी समय पर कोई बड़ी कूटनीतिक सफलता नहीं मिलती है, तो अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को दोबारा निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए (CIA) के निदेशक जॉन रैटक्लिफ और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स समेत कई युद्ध रणनीतिकार मौजूद थे।
तेहरान पहुंचे पाकिस्तानी सेना प्रमुख: कतर के साथ मिलकर समझौता कराने की आखिरी कोशिश
एक तरफ जहां अमेरिका ने सैन्य विकल्प खुले रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी देशों और पाकिस्तान ने युद्ध रोकने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर शनिवार को तेहरान में ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) के कमांडर और देश के मुख्य नीति निर्धारक जनरल अहमद वाहिदी से बेहद अहम मुलाकात कर सकते हैं।
इस शांति मिशन में कतर का एक विशेष राजनयिक प्रतिनिधिमंडल भी आसिम मुनीर के साथ मौजूद है। हालांकि, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इस यात्रा को लेकर बेहद रहस्यमयी रुख अपनाया है और उन्होंने इस “उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल” के तेहरान जाने की खबरों का “न तो खंडन किया और न ही पुष्टि की”। वार्ता से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि कूटनीतिक प्रयास इस समय बेहद “चुनौतीपूर्ण” दौर में हैं और समझौते का मसौदा हर दिन दोनों तरफ भेजा जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी हाथ नहीं लगी है।
परमाणु हथियारों पर फंसा पेच: ट्रंप बोले- “ईरान के पास कोई विकल्प नहीं”
इस पूरे विवाद और युद्ध की मुख्य जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी रणनीति साफ करते हुए कहा, “ईरान इस समय समझौता करना चाहता है। देखते हैं आगे क्या होता है। लेकिन हमने हाल ही में उन्हें बहुत कड़ा झटका दिया है और हमारे पास इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था, क्योंकि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। वे इसे कभी नहीं रख सकते।”
दूसरी ओर, स्वीडन के दौरे पर मौजूद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों से बात करते हुए स्वीकार किया कि ईरान के साथ चल रही बैक-चैनल बातचीत में केवल “मामूली प्रगति” ही देखी गई है, जिससे युद्ध का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
girls globe