Tuesday , October 20 2026

शस्त्र लाइसेंसों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: राजा भैया, धनंजय सिंह और 19 प्रभावशाली लोगों के हथियारों का ब्यौरा तलब

उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के आवंटन और उनके सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार और प्रदेश के आला पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने स्पष्ट कहा है कि हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन कानून के शासन और सामाजिक शांति के विपरीत है, जो आम लोगों में भय का वातावरण पैदा करता है।

कोर्ट ने क्या-क्या तलब किया? (Key Directives)

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  1. 19 प्रभावशाली व्यक्तियों का विवरण: कोर्ट ने राजा भैया (रघुराज प्रताप सिंह), धनंजय सिंह और बृजभूषण शरण सिंह जैसे 19 प्रभावशाली व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंसों की जानकारी मांगी है। कोर्ट का कहना है कि स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इन लोगों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं, जिन्हें अब स्पष्ट करना अनिवार्य है।

  2. आपराधिक पृष्ठभूमि का डेटा: राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सभी लाइसेंस धारकों का जिला, थाना और नामवार विवरण प्रस्तुत किया जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि क्या उनके परिवार के अन्य सदस्यों के पास भी हथियारों के लाइसेंस हैं।

  3. अधिकारियों की जवाबदेही: कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव (गृह), सभी जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों और एसएसपी को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताना होगा कि उन्होंने कोर्ट से कोई जानकारी नहीं छिपाई है।

कोर्ट के सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

हाईकोर्ट के समक्ष पेश किए गए सरकारी आंकड़ों ने प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • कुल लाइसेंस: उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।

  • पेंडिंग आवेदन: विभिन्न श्रेणियों में 23,407 आवेदन अभी भी लंबित हैं।

  • अपील की स्थिति: डीएम के फैसलों के खिलाफ 1,738 अपीलें मंडलायुक्तों के स्तर पर पेंडिंग हैं।

  • एक से अधिक हथियार: लगभग 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक शस्त्र लाइसेंस मौजूद हैं।

  • दागी लाइसेंस धारक: हैरान करने वाली बात यह है कि 6,062 लाइसेंस ऐसे लोगों को दिए गए हैं, जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

“हथियार का प्रदर्शन दबदबे का भ्रम, न कि आत्मरक्षा”

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा:

“हथियारों का खुला प्रदर्शन समाज में ताकत और प्रभुत्व का भ्रम तो पैदा करता है, लेकिन इससे आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है। आत्मरक्षा का अधिकार व्यक्तिगत है, लेकिन इसका सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करना शांतिपूर्ण समाज के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि गृह विभाग द्वारा 20 मई 2026 को दाखिल हलफनामे से यह साफ हो गया है कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में डीएम और एसएसपी समय-समय पर जारी सरकारी आदेशों और आर्म्स एक्ट, 1959 का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं।

अगली सुनवाई 26 मई को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 मई 2026 की तारीख तय की है। कोर्ट का यह रुख यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में उन सभी लोगों के लाइसेंसों की समीक्षा हो सकती है, जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि है या जिनका रसूख प्रशासन पर भारी पड़ता है।