
हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े वैश्विक कारोबार और तकनीकी दौड़ में भले ही भारत शुरुआती दौर में थोड़ा पीछे नजर आ रहा हो, लेकिन लंबी अवधि के लिहाज से यह देश निवेशकों के लिए एक शानदार और सुनहरा अवसर लेकर आ रहा है। वैश्विक स्तर पर AI के अत्यधिक उत्साह (हाइप) और उसमें बन रहे जोखिम भरे माहौल के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय बाजारों की मजबूत नींव विदेशी निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी।
वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर कर्ज का भारी दबाव और सीमित मुनाफा
दुनियाभर में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नाम पर अरबों-खरबों रुपये झोंके जा रहे हैं, लेकिन ताजा रिपोर्ट यह चेतावनी देती है कि अधिकांश AI इंफ्रास्ट्रक्चर भारी-भरकम कर्ज के बलबूते खड़ा किया जा रहा है। यह स्थिति काफी हद तक पुरानी टेलीकॉम और फाइबर नेटवर्क क्रांति जैसी नजर आती है, जहां शुरुआती चकाचौंध के बाद गंभीर वित्तीय जोखिम सामने आए थे। जनरेटिव AI सेगमेंट में कंपनियों ने भारी-भरकम पूंजी लगा तो दी है, लेकिन लगभग 95% संस्थानों को अभी तक इसके जरिए कोई ठोस या उम्मीद के मुताबिक व्यावसायिक लाभ नहीं मिला है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर AI का यह अत्यधिक उत्साह अब निवेशकों को चिंता में डालने लगा है।
भारत की मौजूदा बाजार संरचना क्यों बन सकती है वरदान?
अब तक वैश्विक पूंजी का एक बड़ा हिस्सा AI की अंधी दौड़ के चलते भारत जैसे उभरते बाजारों से निकलकर अमेरिकी टेक और AI कंपनियों की तरफ डायवर्ट हो गया था, जिससे भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI/FII) की निकासी देखने को मिली। हालांकि, रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि मौजूदा दौर में भारत की सीमित भागीदारी जिसे अभी एक कमजोरी माना जा रहा है, असल में आने वाले कल में सबसे बड़ा फायदा साबित होगी। जब दुनियाभर में AI का यह कृत्रिम गुब्बारा फूटेगा और निवेशक दोबारा मजबूत और सुरक्षित आर्थिक आधार पर अपने पैसे का प्रबंधन करेंगे, तब ‘सेल इंडिया’ की धारणा बदलकर सीधे ‘बाय इंडिया’ यानी भारत में बड़े पैमाने पर निवेश का नया दौर शुरू होगा।
मजबूत अर्थव्यवस्था और ग्लोबल जीडीपी में भारत का दबदबा
वैश्विक स्तर पर फंड की अस्थिरता और विदेशी निवेश के बाहर जाने के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे मजबूत और तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है। आज भारत वैश्विक जीडीपी वृद्धि में लगभग 9% का योगदान दे रहा है। इसके अलावा, आगामी वर्षों में भी देश की विकास दर प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले सबसे बेहतर रहने का अनुमान है। स्थानीय स्तर पर तकनीक का उपयोग और डिजिटलाइजेशन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे देश के भीतर ही उत्पादकता और कार्यक्षमता में अभूतपूर्व सुधार हो रहा है। इन तमाम मजबूत बुनियादी पहलुओं के दम पर जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए भारतीय बाजार लॉन्ग-वेल्थ क्रिएशन का सबसे बेहतरीन ठिकाना बनने जा रहा है।
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