
वैदिक ज्योतिष और हिंदू पंचांग के अनुसार आज 22 अगस्त का दिन धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है। आज सावन (श्रावण) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जो देर रात तक रहेगी और इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी। शनिवार का दिन होने के कारण यह समय न्याय के देवता शनिदेव और भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। हालांकि, आज के दिन ‘विष्कुम्भ योग’ का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से किसी नए और बड़े मांगलिक कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
आज की तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति
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तिथि: श्रावण शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (देर रात 02:00 बजे तक, तत्पश्चात एकादशी तिथि)
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वार: शनिवार
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नक्षत्र: ज्येष्ठा नक्षत्र (दोपहर 02:49 बजे तक), इसके बाद मूल नक्षत्र प्रारंभ होगा
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योग: विष्कुम्भ योग (अशुभ योग, जिसके दौरान महत्वपूर्ण नए संकल्प टालने की सलाह दी जाती है)
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करण: तैतिल (दोपहर 12:48 बजे तक), तत्पश्चात गर करण
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सूर्य राशि: सिंह राशि
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चंद्र राशि: वृश्चिक राशि (दोपहर 02:49 बजे तक), इसके बाद चंद्रमा धनु राशि में गोचर करेंगे
सूर्य और चंद्रमा का समय
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सूर्योदय: सुबह 05:54 बजे
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सूर्यास्त: शाम 06:54 बजे
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चन्द्रोदय: दोपहर 02:12 बजे
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चन्द्रास्त: देर रात 12:10 बजे
आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
यदि आप कोई दैनिक धार्मिक अनुष्ठान, मंत्र जाप या सामान्य जरूरी कार्य करना चाहते हैं, तो इन शुभ समयों का चयन कर सकते हैं:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:26 बजे से 05:10 बजे तक (ईश्वर ध्यान और योग-साधना के लिए श्रेष्ठ)
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से 12:50 बजे तक (दिन का सबसे शुभ मुहूर्त)
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अमृत काल: दोपहर 12:54 बजे से 02:34 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:33 बजे से 03:25 बजे तक
आज के अशुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय (Inauspicious Timings)
अशुभ योग और राहुकाल की अवधि में किसी भी प्रकार का नया वित्तीय निवेश, नए व्यापार का उद्घाटन, वाहन की खरीद या लंबी यात्रा आरंभ करने से बचना चाहिए:
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राहुकाल: सुबह 09:08 बजे से 10:46 बजे तक (इस दौरान कोई भी नया कार्य शुरू न करें)
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यमगण्ड काल: दोपहर 02:01 बजे से 03:39 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 05:54 बजे से 07:31 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: सुबह 05:54 बजे से 06:46 बजे तक
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दिशा शूल: पूर्व दिशा (आज के दिन पूर्व दिशा में गैर-जरूरी यात्रा से परहेज करें)
विष्कुम्भ योग और शनिवार पर क्या करें उपाय?
विष्कुम्भ योग के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए आज शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ व ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। काले तिल, उड़द की दाल या जरूरतमंदों को भोजन कराने से सभी दोष दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
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