
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने आज शनिवार, 23 मई 2026 को देश के चारों प्रमुख महानगरों—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल और डीजल के दामों में एक बार फिर बड़ा इजाफा कर दिया है।
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया संकट के बीच पिछले 10 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है। आज शनिवार को दिल्ली में पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल ₹100 के बेहद करीब पहुंच गया है।
चारों महानगरों में पेट्रोल-डीजल के आज के नए रेट्स (23 मई 2026)
शनिवार को हुई बढ़ोतरी और ब्रैकेट में (ताजा इजाफे) के बाद देश के चारों बड़े महानगरों में ईंधन की नई कीमतें इस प्रकार हैं:
| महानगर (City) | पेट्रोल का नया रेट (प्रति लीटर) | डीजल का नया रेट (प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹99.51 (+0.87) | ₹92.49 (+0.91) |
| मुंबई | ₹108.49 (+0.90) | ₹95.02 (+0.94) |
| कोलकाता | ₹110.64 (+0.94) | ₹97.02 (+0.95) |
| चेन्नई | ₹105.31 (+0.82) | ₹96.98 (+0.87) |
15 मई से अब तक: 3 बार में करीब ₹5 महंगा हुआ तेल
मई के इस महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने तीन किस्तों में आम जनता के बजट को भारी नुकसान पहुंचाया है:
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पहली बढ़ोतरी: इसी महीने सबसे पहले तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एकमुश्त 3-3 रुपये का बड़ा इजाफा किया था।
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दूसरी बढ़ोतरी: इसके बाद मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कंपनियों ने दोबारा कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की।
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तीसरी बढ़ोतरी (आज): आज शनिवार को एक बार फिर करीब 90 पैसे तक दाम बढ़ा दिए गए।
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कुल असर: 15 मई से लेकर अब तक, यानी महज 10 दिनों के भीतर दिल्ली में पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुका है।
तेल कंपनियों को रोजाना ₹1000 करोड़ का भारी नुकसान
देश की तीनों प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने साझा तौर पर चिंता जताई है। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक हालातों और सप्लाई चेन बाधित होने के कारण उन्हें हर दिन 1000 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
क्रूड ऑयल का गणित: युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था, जो अब सातवें आसमान पर पहुंचते हुए 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रहा है। कच्चे तेल में आई इस $40 की अभूतपूर्व तेजी के कारण ही घरेलू बाजार में दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
आगे अभी 9 से 12 रुपये तक और बढ़ सकते हैं दाम!
ईंधन की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी के बावजूद आम जनता के लिए आने वाले दिन और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं। पेट्रोलियम इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए तेल कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अभी 9 रुपये से 12 रुपये प्रति लीटर की और बढ़ोतरी की जरूरत है।
सरकार की तरफ से एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती: कंपनियों को दिवालिया होने से बचाने और देश के नागरिकों को सीधे तौर पर इस भीषण महंगाई के झटके से सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम भी उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में 10-10 रुपये प्रति लीटर की भारी कटौती की घोषणा की है। सरकार की इस बड़ी राहत के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इतनी ज्यादा ऊंची हैं कि तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति में बहुत बड़ा सुधार नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि वैश्विक हालातों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी और ऊपर जा सकते हैं।
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