
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘तमिल थाई वाझथु’ (राज्य गीत) को लेकर विवाद गहरा गया है। गुरुवार, 21 मई को चेन्नई के लोक भवन में आयोजित नव-नियुक्त मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान, इस गीत को तीसरे स्थान पर गाए जाने से सहयोगी दलों और विपक्षी नेताओं में नाराजगी है। यह विवाद ऐसे समय में हुआ है जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ है।
क्या है पूरा विवाद?
परंपरा के अनुसार, तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाझथु’ से होती है। हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम और राष्ट्रगान के बाद इसे तीसरे क्रम पर रखा गया। TVK सरकार का कहना है कि यह निर्णय केंद्र सरकार के एक हालिया सर्कुलर के अनुपालन में लिया गया था।
मंत्री आधव अर्जुन ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल कार्यालय ने केंद्र के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया था, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह एक अपरिहार्य स्थिति थी और भविष्य में इस तरह की चूक नहीं दोहराई जाएगी।
सहयोगी दलों और विपक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया
CPI और माकपा: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन और माकपा के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रगान का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन राज्य की सांस्कृतिक पहचान और तमिल भावनाओं के सम्मान के लिए ‘थाई वाझथु’ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
विपक्षी दल DMK: मुख्य विपक्षी दल DMK ने इसे सरकार की विफलता करार दिया है। प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि आश्वासन देने के बावजूद TVK तमिलों के अधिकारों की रक्षा करने में क्यों विफल रही।
कांग्रेस: कांग्रेस ने इस घटना को “बेहद अनुचित” बताया है और इसके लिए सीधे तौर पर केंद्र और BJP को जिम्मेदार ठहराया है।
सरकार की सफाई और आगे की राह
विवाद बढ़ता देख TVK नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाझथु’ को ही प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री विजय ने भी संकेत दिए हैं कि राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए राज्य की गौरवशाली परंपराओं को सर्वोपरि रखा जाएगा।
11 दिनों के भीतर यह दूसरा अवसर है जब राज्य गीत के क्रम को लेकर तमिलनाडु में राजनीति गर्माई है। यह मुद्दा अब केवल प्रोटोकॉल का नहीं, बल्कि राज्य की अस्मिता और केंद्र-राज्य संबंधों का भी बन गया है।
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