News India Live, Digital Desk: केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। राज्य की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली ‘धर्मडम’ इस समय कुरुक्षेत्र बनी हुई है, जहां मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन तीसरी बार चुनावी मैदान में हैं। सत्ताधारी एलडीएफ (LDF) के लिए यह सीट अस्तित्व की लड़ाई है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) और बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) ने मुख्यमंत्री को उनके ही गढ़ में घेरने के लिए चक्रव्यूह तैयार कर लिया है। धर्मडम में बढ़ते तनाव और तीखी बयानबाजी ने इस मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है।
पिनाराई विजयन का ‘अभेद किला’ और विपक्ष की चुनौती
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने धर्मडम से अपना नामांकन दाखिल कर हुंकार भरी है। वे यहां से लगातार दो बार जीत चुके हैं और इस बार ‘हैट्रिक’ लगाने के इरादे से उतरे हैं। हालांकि, इस बार राह पिछली बार जैसी आसान नहीं दिख रही है। यूडीएफ ने युवा कांग्रेस के नेता वी.पी. अब्दुल रशीद को मैदान में उतारकर युवा कार्ड खेला है, जबकि बीजेपी (NDA) की ओर से के. रंजीत अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि धर्मडम में विकास केवल कागजों पर है और सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) इस बार बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।
प्रचार के दौरान झड़प और हिंसा: धर्मडम में तनाव बरकरार
चुनाव प्रचार जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, धर्मडम में हिंसक झड़पें भी सामने आ रही हैं। हाल ही में यूडीएफ उम्मीदवार वी.पी. अब्दुल रशीद पर प्रचार के दौरान हमले की कोशिश की गई, जिसका आरोप सीपीएम (CPI-M) कार्यकर्ताओं पर लगा है। इस घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। कांग्रेस ने इसे ‘हताशा में किया गया हमला’ बताया है, जबकि एलडीएफ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सहानुभूति बटोरने का स्टंट करार दिया है। राजनीतिक हिंसा की इन खबरों ने चुनाव आयोग की चिंता भी बढ़ा दी है।
NDA की ‘धर्म अदालत’ और विकास का मुद्दा
बीजेपी इस बार धर्मडम में तीसरे कोण के रूप में उभरने की कोशिश कर रही है। एनडीए ने यहां ‘धर्म अदालत’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय लोगों की समस्याओं को उठाकर अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। एनडीए का दावा है कि केरल में अब एलडीएफ और यूडीएफ के बारी-बारी वाले शासन से जनता ऊब चुकी है और एक ‘तीसरे विकल्प’ की तलाश में है। केंद्र सरकार की योजनाओं और हिंदुत्व के एजेंडे के साथ बीजेपी इस वामपंथी गढ़ में सेंध लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
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