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अमेरिका में चीन का गुप्त पुलिस स्टेशन,अमेरिकी नागरिक लू जियानवांग दोषी करार

न्यूयॉर्क। अमेरिका की एक फेडरल अदालत ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित चाइनाटाउन में चीन का ‘गुप्त पुलिस स्टेशन’ चलाने के आरोप में 64 वर्षीय अमेरिकी नागरिक लू जियानवांग (हैरी लू) को दोषी पाया गया है। यह केंद्र एक साधारण रामेन स्टॉल के ऊपर चोरी-छिपे संचालित किया जा रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका में रह रहे चीनी सरकार के आलोचकों पर नजर रखना था।

रामेन स्टॉल के ऊपर से चल रहा था जासूसी का खेल

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कथित ‘पुलिस स्टेशन’ की शुरुआत साल 2022 की शुरुआत में हुई थी। इसे न्यूयॉर्क के एक व्यस्त इलाके में एक खाने-पीने की दुकान (रामेन स्टॉल) के ऊपरी फ्लोर से चलाया जा रहा था। एफबीआई (FBI) को जब इस संदिग्ध गतिविधियों की भनक लगी, तो एजेंसी ने तुरंत जांच शुरू की। पकड़े जाने के डर से साल 2022 के अंत तक इस केंद्र को आनन-फानन में बंद कर दिया गया था।

चीन के विरोधियों और लोकतंत्र समर्थकों को बनाया निशाना

प्रॉसिक्यूटर्स ने अदालत में खुलासा किया कि लू जियानवांग चीन के पब्लिक सिक्योरिटी मंत्रालय के सीधे इशारे पर काम कर रहा था। एफबीआई के असिस्टेंट डायरेक्टर जेम्स सी. बार्नाकल जूनियर ने बताया कि इस केंद्र का असली मकसद अमेरिका में रह रहे उन चीनी नागरिकों और लोकतंत्र समर्थकों की निगरानी करना और उन्हें डराना-धमकाना था, जो बीजिंग की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते थे।

सबूत मिटाने की कोशिश और साजिश का पर्दाफाश

अदालत में यह भी साबित हुआ कि लू और उसके सहयोगी चेन जिनपिंग ने एफबीआई की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। जब उन्हें पता चला कि वे रडार पर हैं, तो उन्होंने चीनी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के कई महत्वपूर्ण टेक्स्ट मैसेज डिलीट कर दिए। मामले के दूसरे आरोपी चेन जिनपिंग ने पहले ही स्वीकार किया था कि उसने चीन के लिए अवैध एजेंट के रूप में काम किया है।

दुनिया के 53 देशों में फैला है नेटवर्क?

इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैला दी है। मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न रिपोर्ट्स का दावा है कि चीन ने दुनिया के 53 देशों में 100 से अधिक ऐसे ही ‘गुप्त आउटपोस्ट’ या पुलिस स्टेशन बना रखे हैं।

चीन का पक्ष और अमेरिका का स्टैंड:

  • चीन का दावा: बीजिंग इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। चीन का कहना है कि ये केवल ‘सर्विस स्टेशन’ हैं, जो विदेशों में बसे चीनी नागरिकों को प्रशासनिक कार्य (जैसे ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल) में मदद करते हैं।

  • अमेरिका का स्टैंड: अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह सीधे तौर पर उनकी संप्रभुता का उल्लंघन है और चीन विदेशी धरती पर अपने कानून थोपने की कोशिश कर रहा है।

इस फैसले के बाद अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव और गहराने की आशंका है।