Wednesday , September 2 2026

PM मोदी की बड़ी अपील: एक साल न खरीदें सोना, टाल दें विदेश यात्रा जंग के बीच देश को बचाने के लिए मास्टरप्लान

दुनियाभर में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने तेल और गैस की कीमतों में आग लगा दी है। ढाई महीने से चल रहे इस संघर्ष का असर अब हर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। जहां डॉलर के भाव आसमान छू रहे हैं, वहीं राशन से लेकर सोने तक की कीमतें ‘रोलर कोस्टर’ की तरह ऊपर-नीचे हो रही हैं। इस वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से कुछ कड़े लेकिन जरूरी कदम उठाने की अपील की है, जो सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) को बचाने से जुड़े हैं।

देशभक्ति सिर्फ सीमा पर जान देना नहीं: पीएम मोदी

हैदराबाद में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने जनता से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में देशभक्ति का मतलब सिर्फ सीमा पर जाकर लड़ना नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाना भी सेवा है। पीएम ने देशवासियों से तीन मुख्य आग्रह किए: एक साल तक सोना न खरीदें, कम से कम एक साल विदेश यात्रा पर न जाएं और निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन (जैसे मेट्रो) या कार-पूलिंग का इस्तेमाल करें।

ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने का ‘कोरोना जैसा’ फॉर्मूला

पीएम मोदी ने इन सख्त कदमों की तुलना कोरोना महामारी के दौर से की। उन्होंने बताया कि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ईरान युद्ध और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में पैदा हुई बाधाओं के कारण कच्चे तेल का बिल करोड़ों डॉलर बढ़ गया है। अगर देशवासी सोने के आयात और विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च को कम करते हैं, तो भारत का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रहेगा। यह सीधे तौर पर गिरते हुए रुपये को संभालने में मदद करेगा।

रुपये पर बढ़ता दबाव और कच्चे तेल का खेल

सोमवार को बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में जबरदस्त उछाल देखा गया और यह 105.33 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 100 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा है। तेल की इन बढ़ती कीमतों ने भारत के व्यापार घाटे को बढ़ा दिया है, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। पीएम की अपील का मकसद इसी आर्थिक खाई को पाटना है।

पड़ोसी देशों का हाल: पाकिस्तान में हफ्ते में 4 दिन काम और WFH

भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य देश भी इस ऊर्जा संकट से निपटने के लिए हाथ-पांव मार रहे हैं। पाकिस्तान ने इस दिशा में सबसे पहले सख्त कदम उठाए थे। वहां की सरकार ने सरकारी विभागों के फ्यूल बिल में 50 प्रतिशत की कटौती कर दी है। इसके अलावा, जरूरी सेवाओं को छोड़कर आधे सरकारी स्टाफ के लिए Work From Home (WFH) और हफ्ते में केवल 4 दिन काम करने जैसे नियम लागू किए गए हैं ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके।