वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच एक बार फिर अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा की है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान को चेतावनी देते हुए लिखा कि तेहरान की तरफ से अमेरिका को हल्के में लेने के दिन अब लद चुके हैं।
ट्रंप की पोस्ट: “दे विल बी लाफिंग नो लॉन्गर”
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा:”ईरान लंबे समय से हमारे देश (अमेरिका) की पीठ पीछे हंसता रहा है और हमें मूर्ख समझता रहा है। लेकिन अब वे और नहीं हंस पाएंगे। खेल बदल चुका है और नियम भी।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव चरम पर है और ईरान ने पाकिस्तान के जरिए भेजे गए अमेरिकी शांति प्रस्तावों को ठुकरा दिया है। ट्रंप का यह संकेत साफ है कि अमेरिका अब कूटनीति के बजाय सैन्य दबाव को प्राथमिकता देने वाला है।
यूरेनियम और परमाणु कार्यक्रम पर आर-पार की जंग
इस पूरे विवाद की जड़ में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का भंडार है।
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अमेरिका की मांग: ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपना सारा यूरेनियम भंडार देश से बाहर भेज दे और अपने परमाणु संयंत्रों को पूरी तरह बंद कर दे।
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ईरान का रुख: ईरान इसे अपनी संप्रभुता का हनन मान रहा है और उसने हाल ही में संवर्धन की प्रक्रिया को और तेज करने के संकेत दिए हैं।
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नेतन्याहू का समर्थन: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रंप के इस रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि केवल सख्त सैन्य कार्रवाई ही ईरान के हौसलों को पस्त कर सकती है।
हॉर्मुज में नाकाबंदी और ‘ऑपरेशन’ की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक समुद्री मार्ग ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ की पूरी तरह से नाकाबंदी कर दी है।
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ईंधन संकट: इस नाकाबंदी की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
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भारी गोलाबारी: पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर भारी बमबारी की है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य शक्ति के 70% हिस्से को पहले ही तबाह कर दिया है।
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चीनी दौरा और दबाव: इस तनाव के बीच ट्रंप 13 मई को चीन जा रहे हैं। माना जा रहा है कि वे चीन से ईरान को मिलने वाली आर्थिक मदद को पूरी तरह बंद करने का दबाव बनाएंगे।
क्या युद्ध में सीधे कूदेगा अमेरिका?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह पोस्ट केवल ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ (Psychological Warfare) का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक बड़े जमीनी सैन्य अभियान (Ground Operation) की पूर्व सूचना हो सकती है। यदि ईरान ने शांति प्रस्तावों पर लचीला रुख नहीं अपनाया, तो 12 मई के बाद खाड़ी देशों में संघर्ष और अधिक भीषण हो सकता है।
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