
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने एक बड़ा कार्ड खेलकर सियासी तापमान बढ़ा दिया है। शनिवार को लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि यदि प्रदेश में सपा की सरकार वापस आती है, तो महाराणा प्रताप की जयंती पर दो दिन का राजकीय अवकाश घोषित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने गोमती रिवर फ्रंट पर महाराणा प्रताप की एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने का भी वादा किया, जिसमें उनके हाथ में सोने का भाला होगा।
EVM और सीक्रेट बैलेट पर फिर छिड़ी रार
अखिलेश यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सपा संवैधानिक संस्थाओं को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने तर्क दिया कि जब अमेरिका, जापान, जर्मनी और इंग्लैंड जैसे विकसित देशों में ‘सीक्रेट बैलेट’ (Secret Ballot) से मतदान हो सकता है, तो भारत में इसे अपनाने में क्या समस्या है? अखिलेश ने हुंकार भरते हुए कहा, “हम ईवीएम से जीतकर आएंगे और फिर ईवीएम को ही हटाएंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटरों में जब छेड़छाड़ संभव है, तो ईवीएम की शुचिता पर भी सवाल उठना लाजिमी है।
‘पूंजीपतियों की सरकार’ और कानून-व्यवस्था पर प्रहार
बीजेपी पर निशाना साधते हुए सपा अध्यक्ष ने उन्हें ‘दरारवादी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी केवल पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने का काम करती है और जल्द ही पेट्रोल-डीजल के दाम फिर से बढ़ने वाले हैं। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा देने वालों ने असल में कानून-व्यवस्था को ही ‘जीरो’ कर दिया है।
अखिलेश यादव के 3 बड़े चुनावी वादे
आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए अखिलेश ने अपनी संभावित सरकार का खाका पेश किया और तीन प्रमुख घोषणाएं कीं:
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मुफ्त शिक्षा: केजी (KG) से लेकर पीजी (PG) तक लड़कियों के लिए पूरी पढ़ाई मुफ्त होगी।
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मुफ्त बिजली: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 300 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी।
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स्वास्थ्य सेवाएं: प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के तहत मुफ्त इलाज की मुकम्मल व्यवस्था की जाएगी।
वोट काटने और सुरक्षा बलों पर बड़ा बयान
सपा प्रमुख ने गंभीर आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का डर दिखाकर सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि यूपी में निष्पक्ष चुनाव के लिए कम से कम 10 लाख सुरक्षा बलों की जरूरत पड़ेगी। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि विपक्षी गठबंधन अटूट है और वे मुश्किल समय में साथ छोड़ने वालों में से नहीं हैं।
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