
खाड़ी देशों में युद्ध की बढ़ती आशंकाओं के बीच ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिका के साथ जारी भीषण तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हो रही सैन्य झड़पों के बीच ईरान ने दावा किया है कि उसका मिसाइल स्टॉक अब 120 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ईरानी सेना के इस बयान ने वाशिंगटन तक खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया धमकियों का करारा जवाब है।
ईरान का हुंकार: ‘हमारी मिसाइलें दुश्मन के हर ठिकाने को भेदने में सक्षम’
ईरानी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में मिसाइलों के उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी की गई है। ईरान का दावा है कि उनके पास अब न केवल भारी मात्रा में बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, बल्कि ऐसी तकनीक भी है जो अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकती है। ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि हॉर्मुज जलक्षेत्र में उनके हितों पर हमला हुआ, तो वे अपनी पूरी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे। यह बयान ट्रंप के उस दावे के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने ईरानी सेना को ‘2 मिनट में उड़ाने’ की बात कही थी।
हॉर्मुज में बढ़ता खतरा, दांव पर लगी वैश्विक शांति
ईरान द्वारा मिसाइलों का जखीरा बढ़ाने की खबर ऐसे समय में आई है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक ‘बैटलफील्ड’ में तब्दील होता दिख रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह अपनी सुरक्षा के लिए इस जलमार्ग की घेराबंदी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी और वैश्विक व्यापार ठप हो सकता है। अमेरिका ने पहले ही इस क्षेत्र में अपने बी-52 बॉम्बर्स और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, जिससे स्थिति ‘विस्फोटक’ बनी हुई है।
क्या झुकने को तैयार नहीं हैं तेहरान और वाशिंगटन?
डोनाल्ड ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) नीति के जवाब में ईरान ने अब ‘मैक्सिमम रेजिस्टेंस’ का रास्ता चुना है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान का 120% मिसाइल क्षमता का दावा मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा भी हो सकता है। ईरान यह दिखाना चाहता है कि वह प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों के बावजूद कमजोर नहीं पड़ा है। अब पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या अमेरिका इस नई चुनौती के बाद अपनी रणनीति बदलता है या खाड़ी में युद्ध का नया मोर्चा खुलता है।
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