ईरान-अमेरिका तनाव के बीच चीन को लगा बड़ा झटका हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चीनी टैंकर पर हमला

US-Iran Conflict : खाड़ी देशों में गहराते युद्ध के बादलों के बीच एक ऐसी घटना घटी है जिसने बीजिंग से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव की तपिश अब चीन तक पहुंच गई है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में एक चीनी तेल टैंकर पर हमला हुआ है। इस घटना के बाद चीन ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है और बीजिंग ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त की है। ड्रैगन का मानना है कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

चीन ने जताई ‘गहरी पीड़ा’, तनाव कम करने की अपील

चीनी विदेश मंत्रालय ने टैंकर पर हुए हमले के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने कहा कि वह मध्य-पूर्व (Middle East) की बदलती परिस्थितियों और तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर ‘अत्यधिक चिंतित’ है। चीनी प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। चीन ने अमेरिका और ईरान, दोनों ही पक्षों से संयम बरतने और तनाव को और अधिक न बढ़ाने की अपील की है। बीजिंग को डर है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो उसकी ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक हितों को भारी नुकसान पहुंचेगा।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना ‘डेंजर जोन’, संकट में वैश्विक व्यापार

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह सबसे संकरा समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी जुबानी जंग और सैन्य कार्रवाई ने अब इस रूट को ‘डेथ जोन’ में तब्दील कर दिया है। चीन, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है, टैंकर पर हमले के बाद बैकफुट पर नजर आ रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस रूट पर जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।

अमेरिका-ईरान की जंग में फंसे अन्य देश

वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अपने चरम पर है। अमेरिकी सेना जहां खाड़ी में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है, वहीं ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच चीनी टैंकर पर हुए हमले ने आग में घी डालने का काम किया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है, लेकिन चीन के रुख से साफ है कि वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की तैयारी में है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चीन की मध्यस्थता से यह तनाव थमेगा या फिर यह किसी बड़े युद्ध की आहट है।