
गाजा सिटी: गाजा में शांति बहाली की अमेरिकी कोशिशों और नाजुक युद्धविराम के बीच इजरायल और हमास के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। हमास के शीर्ष नेता और मुख्य वार्ताकार खलील अल-हय्या के बेटे अज्जाम अल-हय्या की इजरायली हवाई हमले में मौत हो गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अज्जाम गाजा शहर में हुए एक हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिसके बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। खलील अल-हय्या के परिवार के लिए यह चौथी बड़ी क्षति है, इससे पहले भी उनके परिवार के तीन सदस्य इजरायली हमलों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
वार्ता को प्रभावित करने की इजरायली रणनीति?
हमास ने इस हमले को लेकर इजरायल पर तीखा प्रहार किया है। हमास के अधिकारियों का आरोप है कि इजरायल जानबूझकर ‘टारगेट किलिंग’ (लक्षित हत्याओं) के जरिए उनके नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हमास के अनुसार, जब एक तरफ शांति वार्ता चल रही है, तब उनके नेताओं के परिजनों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि इजरायल युद्धविराम का सम्मान करने के मूड में नहीं है। एक अन्य हमले में हमास से जुड़े तीन सुरक्षाकर्मियों के भी मारे जाने की खबर है।
“झुकेंगे नहीं, कोई राजनीतिक रियायत नहीं देंगे”
बेटे की मौत पर प्रतिक्रिया देते हुए खलील अल-हय्या ने कहा कि जायोनी हमले साफ तौर पर बताते हैं कि कब्जा करने वाली ताकतें युद्धविराम के पहले चरण को भी लागू नहीं करना चाहतीं। वहीं, हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम ने स्पष्ट किया कि नेताओं के परिवारों को निशाना बनाने की यह नीति उन्हें कमजोर नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमलों से हमास के नेतृत्व या वार्ता प्रतिनिधिमंडल से कोई भी राजनीतिक रियायत हासिल नहीं की जा सकेगी।
गाजा में उमड़ा जनसैलाब, प्रतिरोध की गूंज
अज्जाम अल-हय्या के अंतिम संस्कार के दौरान गाजा शहर की सड़कों पर भारी भीड़ जमा हुई। लोगों ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया। अज्जाम की बहन ने भावुक होते हुए कहा कि उनका परिवार भी बाकी फिलिस्तीनियों की तरह ही है, जिन्होंने इस जंग में भारी बलिदान दिए हैं। इस घटना ने गाजा के आम नागरिकों के बीच इजरायल के प्रति गुस्से को और भड़का दिया है।
ट्रंप की गाजा योजना और वार्ताओं में गतिरोध
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका समर्थित ‘ट्रंप गाजा योजना’ के तहत शांति वार्ताओं का दौर चल रहा है। हालांकि, हमास के निरस्त्रीकरण और गाजा में इजरायली सेना की मौजूदगी जैसे प्रमुख मुद्दों पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। हमास ने साफ कर दिया है कि जब तक इजरायल अपने वादे पूरे नहीं करता, वे अगले दौर की वार्ता में शामिल नहीं होंगे। काहिरा में मध्यस्थों के साथ चल रही बैठकों के बीच हुई इस हत्या ने शांति प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना दिया है।
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