मैथिली ठाकुर और कोमल सिंह: चर्चा में रहे नाम, पर सम्राट कैबिनेट की लिस्ट से क्यों रहे नदारद?

पटना: बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह ने जहां कई नए चेहरों को मौका दिया, वहीं कुछ ऐसे नाम भी थे जिनकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोरों पर थी, लेकिन अंततः उन्हें मंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई गई। ‘लाइव हिंदुस्तान’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस लिस्ट में सबसे चर्चित नाम बिहार की लोक गायिका मैथिली ठाकुर (Maithili Thakur) और युवा नेत्री कोमल सिंह (Komal Singh) के थे।

मैथिली ठाकुर: ‘बिहार ब्रांड’ की चर्चा रही अधूरी

मशहूर लोक गायिका और बिहार के खादी व हस्तशिल्प की ब्रांड एंबेसडर मैथिली ठाकुर को लेकर कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि उन्हें कला एवं संस्कृति विभाग या इसी तरह की किसी जिम्मेदारी के साथ कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।

  • वजह: युवाओं और महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा उन्हें एक सांस्कृतिक चेहरे के रूप में पेश करना चाहती थी।

  • नतीजा: शपथ ग्रहण की फाइनल लिस्ट में उनका नाम न होना उनके प्रशंसकों के लिए चौंकाने वाला रहा। माना जा रहा है कि पार्टी फिलहाल उन्हें संगठन या किसी बोर्ड की जिम्मेदारी देकर उनके कद का उपयोग कर सकती है।

कोमल सिंह: उम्मीदों पर फिरा पानी

पूर्व एमएलसी दिनेश सिंह की बेटी और राजनीति में सक्रिय कोमल सिंह का नाम भी मंत्री पद की दौड़ में काफी आगे बताया जा रहा था।

  • सियासी समीकरण: कोमल सिंह को लेकर चर्चा थी कि वे युवा और महिला कोटे से फिट बैठती हैं। उनके परिवार का राजनीतिक रसूख भी उनके पक्ष में माना जा रहा था।

  • नतीजा: ऐन वक्त पर समीकरण बदले और उन्हें इस बार कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी।

क्यों नहीं मिली जगह?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कैबिनेट विस्तार के समय कई तरह के ‘बैलेंसिंग एक्ट’ करने पड़ते हैं:

  • जातीय और क्षेत्रीय समीकरण: बिहार जैसे राज्य में कैबिनेट गठन के समय जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व सबसे महत्वपूर्ण होता है। कई बार व्यक्तिगत लोकप्रियता पर ये समीकरण भारी पड़ जाते हैं।

  • अनुभव बनाम युवा जोश: सम्राट चौधरी ने अपनी टीम में अनुभव और नए जोश का मिश्रण रखा है। संभव है कि इन चर्चित नामों को भविष्य में किसी अन्य महत्वपूर्ण भूमिका या आगामी चुनाव (2025/2026) के मद्देनजर सुरक्षित रखा गया हो।

क्या अब भी है मौका?

राजनीति में संभावनाओं के द्वार कभी बंद नहीं होते। बिहार में अभी भी कई निगमों और आयोगों में अध्यक्ष व सदस्यों के पद खाली हैं। चर्चा है कि मैथिली ठाकुर और कोमल सिंह जैसे चेहरों को इन महत्वपूर्ण पदों पर मनोनीत कर सरकार उनके समर्थकों को साधने की कोशिश करेगी