
फिनटेक दिग्गज Paytm (One97 Communications) ने अपनी व्यावसायिक रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस के लिए अपने आवेदन को वापस लेने या उसमें बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब पेटीएम का पूरा ध्यान अपने ‘कोर’ (Core) पेमेंट्स बिजनेस और वित्तीय सेवाओं के वितरण (Financial Services Distribution) मॉडल को मजबूत करने पर रहेगा।
NBFC लाइसेंस से पीछे क्यों हटा पेटीएम?
पेटीएम पहले खुद का NBFC लाइसेंस लेकर सीधे कर्ज (Lending) देने की योजना बना रहा था। हालांकि, आरबीआई (RBI) के सख्त नियमों और हालिया नियामक चुनौतियों को देखते हुए, कंपनी ने अपने मॉडल को ‘एसेट-लाइट’ (Asset-Light) रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि पेटीएम खुद कर्ज देने के बजाय अन्य बैंकों और स्थापित NBFC के साथ साझेदारी करके ग्राहकों को लोन दिलाने का काम करेगा।
अब क्या है कंपनी का ‘प्लान बी’?
जी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, पेटीएम अब इन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा:
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पेमेंट बिजनेस का विस्तार: मर्चेंट क्यूआर कोड, साउंडबॉक्स और कार्ड मशीनों के जरिए अपने नेटवर्क को और बढ़ाना।
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वित्तीय सेवाओं का वितरण: पर्सनल लोन, मर्चेंट लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करना।
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बीमा और निवेश: पेटीएम मनी और इंश्योरेंस ब्रोकिंग बिजनेस को रफ्तार देना।
मुनाफे की ओर बढ़ने की कोशिश
पेटीएम के इस कदम को निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों द्वारा सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुद का NBFC बनने में अधिक पूंजी (Capital) और कड़े नियमों का पालन करना पड़ता, जिससे मुनाफे पर असर पड़ सकता था। अब वितरण मॉडल पर ध्यान देकर कंपनी बिना बड़ा जोखिम उठाए कमीशन और सर्विस फीस के जरिए अपनी आय बढ़ा सकती है।
ग्राहकों पर क्या होगा असर?
पेटीएम के इस फैसले से सामान्य यूजर्स के लिए सेवाओं में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी। ग्राहकों को पहले की तरह ही ऐप पर लोन और अन्य वित्तीय सेवाओं के विकल्प मिलते रहेंगे, बस उनके पीछे का ऋणदाता (Lender) कोई पार्टनर बैंक या NBFC होगा
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