
‘थोड़ी सी पीने’ में कोई बुराई नहीं है यह तर्क अक्सर दिया जाता है, लेकिन हालिया शोध कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। ज़ी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, शराब का सेवन केवल आपके लिवर को ही नहीं, बल्कि आपके दिमाग की कार्यप्रणाली और बनावट को भी गहराई से प्रभावित करता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि शराब का असर दिमाग के उन हिस्सों पर सबसे ज्यादा होता है जो निर्णय लेने (Decision Making) और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करते हैं।
दिमाग के ‘ग्रे मैटर’ पर प्रहार
रिसर्च के मुताबिक, शराब का नियमित सेवन दिमाग के ‘ग्रे मैटर’ (Gray Matter) के घनत्व को कम कर देता है। ग्रे मैटर दिमाग का वह हिस्सा है जहाँ सूचनाओं का प्रसंस्करण (Processing) होता है। जब इसकी मात्रा कम होती है, तो व्यक्ति की याददाश्त कमजोर होने लगती है और नई चीजें सीखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। लंबे समय तक शराब पीने से दिमाग ‘सिकुड़ने’ लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘ब्रेन एट्रोफी’ कहा जाता है।
संचार व्यवस्था में गड़बड़ी: न्यूरोट्रांसमीटर्स का खेल
हमारा दिमाग रसायनों के जरिए संदेश भेजता है, जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर्स (Neurotransmitters) कहते हैं। शराब इन रसायनों के संतुलन को बिगाड़ देती है:
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गाबा (GABA): शराब गाबा के प्रभाव को बढ़ाती है, जिससे शरीर सुस्त पड़ जाता है और बोलने में लड़खड़ाहट आती है।
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ग्लूटामेट (Glutamate): यह दिमाग को सक्रिय रखने वाला रसायन है, जिसे शराब दबा देती है। यही कारण है कि शराब के नशे में व्यक्ति की प्रतिक्रिया देने की गति (Response Time) धीमी हो जाती है।
व्यवहार में बदलाव और ‘ब्लैकआउट’
शराब दिमाग के हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) हिस्से को प्रभावित करती है, जो यादें बनाने के लिए जिम्मेदार है। अत्यधिक सेवन से ‘ब्लैकआउट’ की स्थिति पैदा होती है, जहाँ व्यक्ति को होश में रहने के बावजूद बाद में कुछ याद नहीं रहता। इसके अलावा, यह प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को सुस्त कर देती है, जिससे व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो देता है और आक्रामक या असामान्य व्यवहार करने लगता है।
क्या ये नुकसान ठीक हो सकते हैं?
अच्छी खबर यह है कि ‘न्यूरोप्लास्टिसिटी’ के कारण हमारा दिमाग खुद को ठीक करने की क्षमता रखता है। अगर शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दिया जाए, तो कुछ हफ्तों या महीनों में दिमाग की कार्यक्षमता में सुधार होने लगता है। हालाँकि, वर्षों तक अत्यधिक सेवन से हुए कुछ नुकसान स्थायी भी हो सकते हैं। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य और तेज दिमाग के लिए शराब से दूरी बनाना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय है।
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