
Oil Price Today Update: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मची उथल-पुथल के बीच अब स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में करीब 8% की भारी गिरावट के बाद अब भाव स्थिर हो गए हैं। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव को खत्म करने के लिए एक नए शांति प्रस्ताव पर विचार किया जाना है।
वर्तमान में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $102 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $96 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की तैयारी
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन ने एक पेज का मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पेश किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को धीरे-धीरे फिर से खोलना है। गौरतलब है कि फरवरी के अंत से यह रूट काफी हद तक बंद है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में संकट गहरा गया था।
फिलहाल इस चोकपॉइंट पर दोहरी नाकाबंदी है:
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ईरान: ट्रैफिक में रुकावट डाल रहा है।
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अमेरिका: ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों को रोककर तेहरान की तेल इंडस्ट्री पर दबाव बना रहा है।
प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर एक सख्त पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा, “अगर ईरान सहमत शर्तों को मान लेता है, तो अमेरिका अपना सैन्य अभियान खत्म कर देगा और नाकाबंदी हटा लेगा। लेकिन अगर वे राजी नहीं होते, तो बमबारी फिर से शुरू हो जाएगी।”
ट्रंप पर घरेलू स्तर पर भी युद्ध खत्म करने का भारी दबाव है, क्योंकि अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ने से वोटर्स की नाराजगी का डर है।
चीन की भूमिका और आगामी समिट
चीन ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई है। चीनी टॉप डिप्लोमैट्स ने ईरान से होर्मुज स्ट्रेट को जल्द खोलने की मांग की है। इसके अलावा, 14-15 मई को बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम समिट होने वाली है, जहां तेल आपूर्ति और युद्ध विराम पर चर्चा संभव है।
अमेरिकी तेल निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर
एक तरफ जहां वैश्विक सप्लाई चेन बाधित है, वहीं अमेरिकी सरकार के डेटा से पता चला है कि पिछले हफ्ते अमेरिका से पेट्रोलियम उत्पादों का एक्सपोर्ट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सप्लाई की कमी के बीच अमेरिका दुनिया का एक प्रमुख फ्यूल सप्लायर बनकर उभरा है। हालांकि, देश के भीतर कच्चे तेल का स्टॉक गिरा है।
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