
Supreme Court Judges Strength Update: देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस (CJI) समेत जजों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की जाएगी।
संसद के अगले सत्र में पेश होगा विधेयक
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश के अलावा 33 जज कार्यरत हैं। इस संख्या में 4 जजों की बढ़ोतरी करने के लिए सरकार संसद के आगामी सत्र में एक संशोधन विधेयक पेश करेगी। संसद से मंजूरी मिलते ही देश की सबसे बड़ी अदालत 38 जजों की पूरी क्षमता के साथ काम कर सकेगी।
क्यों पड़ी जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत?
सरकार का मानना है कि जजों की संख्या में वृद्धि होने से सुप्रीम कोर्ट का कामकाज अधिक प्रभावी और तेज होगा।
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लंबित मामलों का निपटारा: देश की शीर्ष अदालत पर केसों का भारी दबाव है। नए जजों की नियुक्ति से पेंडिंग केसों को तेजी से सुलझाया जा सकेगा।
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त्वरित न्याय: आम नागरिकों को न्याय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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संसाधन और खर्च: जजों की सैलरी, नया स्टाफ और अन्य सुविधाओं पर होने वाला खर्च ‘भारत की संचित निधि’ (Consolidated Fund of India) से वहन किया जाएगा।
संसद के पास है संख्या तय करने की शक्ति
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या निर्धारित करने का विशेष अधिकार संसद के पास है। समय-समय पर न्यायिक जरूरतों को देखते हुए संसद ने संशोधनों के माध्यम से इस संख्या को बढ़ाया है।
कब-कब बढ़ी जजों की संख्या? (इतिहास पर एक नजर)
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने का सिलसिला 1956 से शुरू हुआ था:
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1956: शुरुआत में जजों की अधिकतम संख्या केवल 10 (CJI को छोड़कर) थी।
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1960: संख्या बढ़ाकर 13 की गई।
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1977: इसे बढ़ाकर 17 किया गया।
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1986: जजों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 की गई।
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2009: संशोधन के जरिए संख्या 30 तक पहुंची।
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2019: पिछली बार जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 (CJI को छोड़कर) की गई थी।
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2026: अब इसे बढ़ाकर 37+1 (कुल 38) करने की तैयारी है।
इस बड़े प्रशासनिक बदलाव से भारतीय न्यायिक प्रणाली में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है, जिससे कानून व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।
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