Prabhat Vaibhav, Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की महत्वाकांक्षी योजना ‘मानस खंड कॉरिडोर’ पर काम तेज हो गया है। इसी के तहत रुद्रपुर में प्रस्तावित भव्य शिव कॉरिडोर को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू हो गई है। यह कॉरिडोर न केवल आस्था का केंद्र होगा, बल्कि कुमाऊं की लोक संस्कृति और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा मेल भी बनेगा।
तीन मंदिरों का अद्भुत संगम: एक सूत्र में बंधेंगे आस्था के केंद्र
रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा ने पर्यटन विभाग और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के अधिकारियों के साथ गंगापुर रोड का स्थलीय निरीक्षण किया। इस परियोजना के तहत क्षेत्र के तीन प्रमुख मंदिरों— प्राचीन शिव मंदिर, गोल्ज्यू मंदिर और नीलकंठ धाम को आपस में जोड़कर एक भव्य कॉरिडोर का रूप दिया जाएगा। महापौर ने बताया कि प्रभारी मंत्री प्रदीप बत्रा के निर्देशों के बाद परियोजना का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
मड हाउस और वेडिंग डेस्टिनेशन: पर्यटकों को लुभाएगा ग्रामीण परिवेश
इस कॉरिडोर की सबसे खास बात यहां बनने वाले ‘मड हाउस’ होंगे। पर्यटकों को उत्तराखंड के पारंपरिक ग्रामीण जीवन का अनुभव देने के लिए मिट्टी और प्राकृतिक संसाधनों से इन घरों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, इस पवित्र स्थल को एक भव्य वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, ताकि लोग आध्यात्मिक वातावरण में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रम संपन्न कर सकें। श्रद्धालुओं के लिए यहां आधुनिक विश्राम गृहों की भी व्यवस्था होगी।
संस्कृति की पाठशाला: नई पीढ़ी को मिलेगा सनातन संस्कारों का ज्ञान
प्रस्तावित शिव कॉरिडोर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं होगा, बल्कि यह ज्ञान का केंद्र भी बनेगा। महापौर ने जानकारी दी कि यहां एक ‘संस्कृति की पाठशाला’ शुरू की जाएगी। इस पाठशाला का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन मूल्यों, संस्कारों और उत्तराखंड की समृद्ध बंगाली व कुमाऊंनी संस्कृति से रूबरू कराना है। यह कॉरिडोर विभिन्न समुदायों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का साझा मंच बनेगा।
जल्द होगा शिलान्यास: मुख्यमंत्री धामी रखेंगे आधारशिला
परियोजना का विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार होते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं रुद्रपुर आकर इसका शिलान्यास करेंगे। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त शिप्रा जोशी सहित कई विभागों के उच्चाधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कॉरिडोर का डिजाइन ऐसा तैयार किया जाए जिससे स्थानीय पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
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