Prabhat Vaibhav, Digital Desk : भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही एक बड़ा विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर भगवान बदरी विशाल की मूर्ति का एक वीडियो और कुछ तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसे ‘निर्वाण दर्शन 2026’ बताया जा रहा है। बदरीनाथ मंदिर के गर्भगृह के भीतर फोटो खींचना या वीडियो बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, ऐसे में इस कथित वीडियो के सामने आने से श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों में भारी आक्रोश है।
क्या है वायरल वीडियो का सच?
इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित यह वीडियो लगभग 30 सेकंड का है। दावा किया जा रहा है कि यह 23 अप्रैल 2026 को कपाट खुलने के बाद के पहले निर्वाण दर्शन हैं।
क्या होते हैं निर्वाण दर्शन? कपाट खुलने के बाद दोपहर तक भगवान नारायण का शृंगार नहीं किया जाता, इसे ही ‘निर्वाण दर्शन’ कहा जाता है। इसके बाद रावल (मुख्य पुजारी) द्वारा महाभिषेक और शृंगार की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
परंपरा का उल्लंघन: बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवनचंद्र उनियाल ने कहा कि भगवान की मूर्ति को कैमरे में कैद करना और उसे सार्वजनिक करना सदियों पुरानी परंपराओं और मर्यादाओं के विरुद्ध है।
प्रशासन और मंदिर समिति का सख्त रुख
बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) और चमोली जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
भ्रामक प्रचार पर लगाम: BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि कुछ लोग यात्री व्यवस्थाओं को लेकर भ्रामक बातें फैलाकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मंदिर के भीतर डिजिटल उपकरणों का प्रयोग वर्जित है और इस उल्लंघन की गहन जांच की जाएगी।
DM का आश्वासन: जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर समिति से जानकारी लेकर यह पता लगाया जाएगा कि वीडियो कब और किसने बनाया। दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
भक्तों से अपील
मंदिर समिति ने सभी तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे धाम की गरिमा और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करें। मंदिर परिसर में मोबाइल या कैमरा ले जाने से बचें और किसी भी प्रकार के भ्रामक वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।
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