
घर की मरम्मत या नया मकान बनवाने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं की जेब पर आने वाले दिनों में अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। देश के पेंट उद्योग में एक बार फिर तैयार उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के साफ संकेत मिल रहे हैं। त्योहारी और शादियों के सीजन के बाद बाजार में रंगों की मांग बनी हुई है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग लागत में आए अचानक उछाल ने पेंट कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। भारत की सबसे बड़ी पेंट निर्माता कंपनी एशियन पेंट्स (Asian Paints) समेत कई अग्रणी कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि कच्चे माल की लागत का दबाव इसी तरह बना रहा, तो कीमतों में क्रमिक बढ़ोतरी करना अपरिहार्य हो जाएगा। यह खबर सीधे तौर पर उन लाखों परिवारों को प्रभावित करेगी जो अपने घरों के रंग-रोगन की तैयारी में जुटे हैं, साथ ही रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी फिनिशिंग लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
एशियन पेंट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) अमित सिंगले ने हालिया पोस्ट-अर्निंग्स और इंडस्ट्री बातचीत में संकेत दिया है कि कंपनी अपने ऑपरेटिंग मार्जिन और वित्तीय स्थिरता की रक्षा के लिए कीमतों में कैलिब्रेटेड यानी चरणबद्ध बढ़ोतरी कर सकती है। सिंगले के अनुसार, वैश्विक स्तर पर जियोपॉलिटिकल तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण इनपुट लागत पर असर 15 से 20 प्रतिशत तक देखा गया है। हालांकि कंपनियों ने इस बढ़ी हुई लागत का पूरा भार अभी तक आम ग्राहकों पर नहीं डाला है और लागत को आंतरिक दक्षताओं के जरिए अवशोषित (absorb) करने की कोशिश की है। लेकिन ग्रॉस मार्जिन पर बढ़ते दबाव को देखते हुए आगामी महीनों में 3 से 5 प्रतिशत तक की नई मूल्य वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। बर्जर पेंट्स (Berger Paints) और कंसाई नेरोलैक जैसी अन्य बड़ी कंपनियों के प्रबंधन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कच्चे माल के मौजूदा ट्रेंड को देखते हुए उद्योग जगत को संतुलित मूल्य संशोधन का रास्ता चुनना पड़ सकता है।
आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल के उतार-चढ़ाव का दीवार पर लगने वाले पेंट से क्या सीधा संबंध है? असल में पेंट उद्योग सीधे तौर पर पेट्रोकेमिकल और क्रूड डेरिवेटिव्स पर टिका हुआ है। किसी भी सजावटी या इंडस्ट्रियल पेंट के निर्माण में लगने वाले कुल कच्चे माल का लगभग 35 से 45 प्रतिशत हिस्सा क्रूड ऑयल डेरिवेटिव्स और पेट्रोकेमिकल सॉल्वेंट्स से आता है। पेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख रासायनिक घटक जैसे थैलिक एनहाइड्राइड, मिनरल टर्पेन्टाइन ऑयल (MTO), विनाइल एसीटेट मोनोमर (VAM), ब्यूटाइल एक्रिलेट और विभिन्न प्रकार के रेजिन सीधे तौर पर पेट्रोलियम रिफाइनिंग के सह-उत्पाद हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के भाव चढ़ते हैं, इन सभी सॉल्वेंट्स और केमिकल्स के भाव वैश्विक स्तर पर बढ़ जाते हैं, जिससे पेंट तैयार करने की बुनियादी लागत सीधे बढ़ जाती है।
कच्चे तेल की तेजी केवल पेंट के रासायनिक फॉर्मूलेशन तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि यह पैकेजिंग और ढुलाई लागत को भी सीधे तौर पर प्रभावित करती है। पेंट जिन प्लास्टिक बाल्टियों (Pails) या टिन कंटेनरों में पैक होकर दुकानों तक पहुंचता है, वे पॉलीप्रोपाइलीन (PP) और हाई-डेंसिटी पॉलीइथाइलीन (HDPE) जैसे पॉलिमर से बनते हैं, जो स्वयं पेट्रोलियम आधारित उत्पाद हैं। क्रूड में तेजी आते ही पैकेजिंग मैटेरियल महंगा हो जाता है। इसके अलावा डीजल की कीमतों में इजाफे से देशव्यापी ट्रांसपोर्टेशन और वेयरहाउसिंग का खर्च बढ़ता है। साथ ही, पेंट निर्माण के सबसे अहम पिगमेंट टाइटेनियम डाइऑक्साइड (TiO2) और कई प्रमुख सॉल्वेंट्स का भारत में बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव से आयात बिल और भी बढ़ जाता है, जिससे घरेलू पेंट कंपनियों की इनपुट कॉस्ट पर बहुस्तरीय दबाव बन जाता है।
यदि दिग्गज कंपनियां अपने उत्पादों के दाम 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ाती हैं, तो इसका सीधा असर बाजार के विभिन्न सेगमेंट्स पर अलग-अलग दिखेगा। प्रीमियम इमल्शन, वेदर-प्रूफ एक्सटीरियर पेंट और वाटरप्रूफिंग सॉल्यूशंस के दामों में प्रति लीटर उल्लेखनीय अंतर आ सकता है। हालांकि एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनियां डिस्ट्रीब्यूटर्स और डीलर्स को आकर्षित करने के लिए कुछ प्रमोशनल स्कीम्स और कैश डिस्काउंट जारी रख सकती हैं ताकि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में वॉल्यूम ग्रोथ प्रभावित न हो। आदित्य बिड़ला समूह के बिड़ला ओपस जैसे नए बड़े खिलाड़ियों के आने से बाजार में प्रतिस्पर्धा पहले से अधिक तेज है, जिससे कंपनियां एक साथ भारी इजाफा करने के बजाय बेहद नपे-तुले और चरणबद्ध तरीके से ही कीमतें बढ़ाएंगी। फिर भी, यदि क्रूड में नरमी नहीं आई, तो आने वाले महीनों में घरों की रंगाई-पुताई का कुल बजट 5 से 8 प्रतिशत तक महंगा पड़ना तय माना जा रहा है।
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