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यूथ कांग्रेस ने 200 से ज्यादा नेताओं को किया सस्पेंड, राहुल गांधी के कार्यक्रम से दूरी पर बड़ा एक्शन

भारतीय राजनीतिक गलियारों, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के भीतर मचे घमासान और संगठनात्मक अनुशासन से जुड़ी एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में हाल ही में आयोजित विपक्षी ‘इंडी गठबंधन’ और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की एक विशाल रैली में अपनी उपस्थिति दर्ज न कराने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर पार्टी हाईकमान ने अब कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। भारतीय युवा कांग्रेस (Indian Youth Congress) ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का चाबुक चलाते हुए देश भर से अपने 200 से अधिक युवा नेताओं और सदस्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। पार्टी के इस कड़े और अचानक उठाए गए कदम से संगठन के भीतर भारी खलबली मच गई है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद निलंबित किए गए कई नेताओं ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तानाशाही रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगाया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि युवा कांग्रेस के भीतर यह पूरा विवाद क्या है, किन-किन राज्यों में यह गाज गिरी है और निलंबित नेताओं ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है।

राहुल गांधी की रैली में अनुपस्थिति पर युवा कांग्रेस का बड़ा एक्शन, 200 से ज्यादा नेता सस्पेंड

राजनीतिक दलों में अनुशासन और रैलियों में भीड़ जुटाना हमेशा से ही उनकी ताकत का मुख्य पैमाना रहा है। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित राहुल गांधी की रैली को सफल बनाने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों से कई ऐसे पदाधिकारी और कार्यकर्ता थे जो किन्हीं कारणों से इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए उन सभी नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है जिन्होंने इस रैली से दूरी बनाई थी। सामने आए आधिकारिक निलंबन पत्रों के अनुसार, अब तक देश के कुल सात अलग-अलग राज्यों से कम से कम 185 से अधिक सदस्यों को पार्टी से निलंबित किया जा चुका है। इतना ही नहीं, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि जैसे-जैसे अनुशासनात्मक समीक्षा का यह दायरा आगे बढ़ेगा, यह सस्पेंशन का आंकड़ा बढ़कर 500 तक भी पहुंच सकता है।

“15 साल पार्टी के लिए जेल गए, एक रैली में न पहुंचने पर निकाल दिया”: निलंबित नेताओं का छलका दर्द

युवा कांग्रेस द्वारा अचानक की गई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद कई निलंबित सदस्यों और पदाधिकारियों ने खुलकर अपना गुस्सा और हैरानी जाहिर की है। उनका कहना है कि पार्टी ने केवल एक दिन की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर उनके सालों की निष्ठा और मेहनत को नजरअंदाज कर दिया है, जबकि उन्होंने अपना पूरा जीवन पार्टी की सेवा में समर्पित कर दिया था।

ऐसा ही एक बड़ा मामला युवा कांग्रेस के महासचिव रोहित राजोरिया (Rohit Rajoria) का सामने आया है, जिन्हें बिना किसी पूर्व चेतावनी या पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिए उनके पद से हटा दिया गया। अपना दर्द बयां करते हुए रोहित राजोरिया ने कहा, “हमने कांग्रेस पार्टी के लिए जमीन पर संघर्ष किया है, हमारे ऊपर कई एफआईआर दर्ज हुई हैं और हम कई बार जेल भी गए हैं। क्या हमारी इतनी लंबी वफादारी की कीमत सिर्फ एक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने की वजह से इस तरह चुकाई जाएगी?”

पारिवारिक शोक और तेरवीं का हवाला देने के बावजूद नहीं सुनी गई दलील

रोहित राजोरिया ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए बताया कि उन्होंने पार्टी के लिए पिछले 15 वर्षों से पूरी ईमानदारी के साथ काम किया है। इस दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित तमाम विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की वजह से उनके खिलाफ लगभग 15 मुकदमे (FIR) दर्ज हुए थे और उन्हें तीन से चार बार जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।

राजोरिया ने एक कार्ड दिखाते हुए बताया कि जिस दिन दिल्ली में राहुल गांधी की रैली थी, उसी दौरान उनके परिवार में उनके दिवंगत चाचा की तेरवीं का कार्यक्रम था, जिसमें उनका शामिल होना अनिवार्य था। उन्होंने दावा किया कि इस पारिवारिक शोक और मजबूरी के बारे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पहले ही लिखित रूप में सूचित कर दिया था और बता दिया था कि वे 1 नवंबर को दिल्ली नहीं पहुंच पाएंगे। इसके बावजूद, केवल एक कार्यक्रम में अनुपस्थिति का हवाला देकर उन्हें तुरंत पद से बर्खास्त कर देना इस बात का प्रमाण है कि संगठन का रवैया कितना मनमाना हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी अपने ही वफादार कार्यकर्ताओं के साथ ऐसा बर्ताव करेगी, तो वह भविष्य में सत्ता में वापसी की उम्मीद कैसे कर सकती है।

किन-किन राज्यों में हुई सबसे बड़ी कार्रवाई? मध्य प्रदेश और गुजरात शीर्ष पर

युवा कांग्रेस द्वारा की गई इस देशव्यापी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में कई राज्य आए हैं। संगठन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़ी गाज मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के युवा नेताओं पर गिरी है, जहां अकेले 60 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके बाद गुजरात (Gujarat) में 49 और पश्चिम बंगाल (West Bengal) में 26 सदस्यों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।

इनके अलावा अन्य राज्यों की बात करें तो तेलंगाना में 14, मध्य उत्तर प्रदेश में 13, कांग्रेस शासित राज्य हिमाचल प्रदेश में 13 और हरियाणा में 10 सदस्यों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। चुनाव और आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले युवा संगठन के भीतर हुई इस बड़ी उथल-पुथल से कांग्रेस की आंतरिक कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।