
बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सर्वोच्च नेता लालू प्रसाद यादव का परिवार हमेशा से देश की मीडिया और राजनीतिक गलियारों की सुर्खियों में बना रहता है। लेकिन बिहार के सियासी इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो एक ऐसा भी अध्याय सामने आता है जब लालू परिवार में हुई एक शादी केवल भव्यता या व्यंजनों के लिए नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसियों के भारी शिकंजे के लिए याद की जाती है। यह कहानी है उस ऐतिहासिक और चर्चित विवाह समारोह की जिसने पूरे देश के राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र में भूचाल ला दिया था। इस भव्य आयोजन के बाद आयकर विभाग (Income Tax Department) ने ऐसी अभूतपूर्व कार्रवाई की कि एक-दो नहीं, बल्कि देश भर के करीब 125 बड़े दिग्गजों और राजनेताओं को सीधे कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया गया था। उस दौर में इस कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई ने न केवल बिहार बल्कि पूरी दिल्ली की राजनीति का तापमान चरम पर पहुंचा दिया था।
#1 क्या था लालू परिवार की उस सबसे चर्चित और बहुचर्चित शादी का पूरा मामला?
बात उस दौर की है जब बिहार में लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सत्ता का दौर हुआ करता था। लालू परिवार में विवाह का यह भव्य आयोजन पटना में बेहद शाही अंदाज में आयोजित किया गया था। इस शादी में देश भर के कई राज्यों से वीवीआईपी मेहमान, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और दिग्गज उद्योगपति शरीक होने के लिए पहुंचे थे। शादी में की गई सजावट, मेहमानों के स्वागत के लिए बनाए गए विशाल पंडाल, गाड़ियों के लंबे काफिले और भव्य खान-पान का नजारा किसी सपने जैसा नजर आ रहा था। लेकिन जैसे ही यह शादी समारोह संपन्न हुआ, शादी पर हुए बेहिसाब खर्च, महंगे उपहारों और वित्तीय लेन-देन की खबरें मीडिया की मुख्य सुर्खियां बन गईं। इस बेहिसाब खर्च को लेकर आयकर विभाग और वित्त मंत्रालय की निगाहें तुरंत इस आयोजन पर टिक गईं।
#1 आयकर विभाग का बड़ा एक्शन: 125 राजनेताओं को एक साथ जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
विवाह समारोह की भव्यता और उसमें हुए कथित बेहिसाब वित्तीय खर्चों की शुरुआती पड़ताल के बाद आयकर विभाग ने बेहद आक्रामक और सख्त रुख अपनाया। जांच एजेंसी ने शादी में शामिल हुए उन तमाम रसूखदार मेहमानों और राजनेताओं की सूची तैयार की जिन्होंने इस शादी के आयोजन में महंगे उपहार (Gifts), चांदी-सोने के आभूषण या वित्तीय योगदान दिया था। देखते ही देखते आयकर विभाग ने देश के अलग-अलग राज्यों से इस शादी में शामिल हुए लगभग 125 वरिष्ठ राजनेताओं, विधायकों और राजनीतिक हस्तियों को नोटिस थमा दिए। नोटिस में उन सभी से शादी में दिए गए उपहारों के स्रोत, उनकी मौद्रिक कीमत और अपने आयकर विवरण (IT Return) में उनके उल्लेख को लेकर कड़े सवाल पूछे गए थे। एक साथ 125 दिग्गजों को मिले इस नोटिस ने पूरे देश की राजनीति में खलबली मचा दी थी।
#1 राजनीतिक गलियारों में मची थी भारी हलचल और वित्तीय जांच का दायरा
जब 125 राजनेताओं को आयकर विभाग के नोटिस मिलने की खबर सार्वजनिक हुई, तो लालू परिवार और उनके सहयोगी दलों में हड़कंप मच गया। विपक्षी दलों ने उस समय की सरकार और लालू प्रसाद यादव पर सत्ता के दुरुपयोग और काले धन के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं दूसरी ओर, राजद और उनके समर्थकों ने इस पूरी कार्रवाई को केंद्र सरकार द्वारा संचालित राजनीतिक बदले की भावना और बदले की कार्रवाई करार दिया था। जांच अधिकारियों ने शादी का ठेका लेने वाले टेंट हाउस मालिकों, कैटरिंग सर्विस प्रोवाइडरों, आभूषण विक्रेताओं और अन्य इवेंट आयोजकों के खातों की भी गहनता से जांच की थी ताकि शादी में खर्च हुई असली राशि का सटीक ब्योरा निकाला जा सके।
#1 भारतीय राजनीति और जांच एजेंसियों के इतिहास में दर्ज हुई यह अनोखी घटना
लालू परिवार की इस शादी के बाद हुई आयकर विभाग की यह कार्रवाई भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अनोखी मिसाल मानी जाती है। आमतौर पर किसी शादी समारोह में शिरकत करने वाले मेहमानों या गिफ्ट देने वालों पर इस तरह इतने बड़े पैमाने पर आयकर विभाग की गाज गिरना बहुत दुर्लभ माना जाता है। इस घटना ने यह साबित कर दिया था कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं के व्यक्तिगत और पारिवारिक आयोजन भी कड़े वित्तीय मानकों और जांच एजेंसियों की पैनी नजर से बाहर नहीं हैं। आज इतने वर्षों के बाद भी जब भी बिहार के सियासी इतिहास या हाई-प्रोफाइल राजनीतिक शादियों के खर्चों का जिक्र होता है, तो 125 नेताओं को मिले इस आयकर नोटिस का किस्सा प्रमुखता से याद किया जाता है।
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