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बालों का झड़ना और बार-भाग बीमार पड़ना हो सकता है जिंक की कमी का बड़ा संकेत

भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खानपान और खानपान में पोषक तत्वों की कमी के कारण आज के समय में अधिकांश लोग किसी न किसी शारीरिक समस्या से जूझ रहे हैं। अक्सर लोग बालों के झड़ने, त्वचा के बेजान होने या बार-बार सर्दी-जुकाम होने की समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे शरीर में किसी बेहद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व यानी ‘जिंक’ (Zinc) की भारी कमी हो सकती है? हमारे शरीर को भले ही जिंक की आवश्यकता बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन यह कोशिकाओं के विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System), मेटाबॉलिज्म और घाव भरने की प्रक्रिया के लिए एक अनिवार्य खनिज है। जब शरीर में जिंक का स्तर सामान्य से नीचे गिरने लगता है, तो हमारा शरीर कई तरह के अंदरूनी और बाहरी संकेत देने लगता है। समय रहते यदि इन लक्षणों की पहचान न की जाए, तो यह स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है।

#1 बालों का तेजी से टूटना और स्कैल्प का कमजोर होना

जिंक की कमी का सबसे पहला और सबसे आसानी से दिखाई देने वाला असर हमारे बालों और त्वचा पर पड़ता है। यदि आपके बाल कंघी करते समय या सोते समय अचानक बहुत ज्यादा झड़ने लगे हैं, बालों की चमक खत्म हो गई है और वे बेहद कमजोर व बेजान नजर आ रहे हैं, तो यह शरीर में जिंक की कमी का स्पष्ट संकेत हो सकता है। जिंक बालों के रोम (Hair Follicles) के विकास और उनकी मरम्मत करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। इसके अलावा, जिन लोगों के शरीर में जिंक की कमी होती है, उन्हें त्वचा पर रूखापन, चेहरे पर बार-बार मुहांसे (Acne), और नाखूनों पर सफेद धब्बे पड़ने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नाखून भी बहुत कमजोर होकर टूटने लगते हैं।

#1 बार-बार बीमार पड़ना और इम्युनिटी का कमजोर होना

यदि आप साल के बारह महीने किसी न किसी मौसमी संक्रमण, सर्दी-जुकाम, वायरल फीवर या गले के इंफेक्शन की चपेट में आते रहते हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बहुत ज्यादा कमजोर हो चुकी है। जिंक हमारे इम्यून सिस्टम की कोशिकाओं को सक्रिय रखने और बाहरी वायरस व बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत प्रदान करने का काम करता है। शरीर में जिंक की कमी होने पर श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे शरीर बीमारियों से मुकाबला करने में असमर्थ हो जाता है। छोटी-छोटी बीमारियां भी लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़ती हैं।

#1 घावों का बहुत धीरे भरना और त्वचा पर संक्रमण का खतरा

हमारे शरीर में कहीं भी कट लग जाने, छिल जाने या चोट लगने पर उसे ठीक करने की जिम्मेदारी जिंक की होती है। जिंक कोलेजन के निर्माण और ऊतकों (Tissues) की मरम्मत करने में मदद करता है। यदि आपके शरीर में जिंक का स्तर कम है, तो मामूली कटने या चोट लगने पर भी वह घाव भरने में सामान्य से कई गुना अधिक समय लेगा। इसके अलावा, त्वचा पर किसी भी प्रकार के फंगल इंफेक्शन, रैशेज या सोरायसिस जैसी समस्याएं आसानी से अपनी पकड़ बना लेती हैं और दवाइयां खाने के बावजूद जल्दी ठीक नहीं होती हैं।

#1 पाचन संबंधी समस्याएं और बेवजह वजन कम होना

क्या आपको अक्सर बिना किसी स्पष्ट कारण के पाचन की गड़बड़ी, पेट की सूजन, भूख न लगना या दस्त जैसी समस्याएं परेशान करती हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए भी जिंक एक आवश्यक खनिज है। इसकी कमी से आंतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता और पोषक तत्वों का अवशोषण रुक जाता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में कमजोरी आने लगती है, स्वाद और सूंघने की क्षमता में कमी महसूस हो सकती है, और कई बार बिना किसी जिम या डाइट के अचानक वजन तेजी से घटने लगता है।

#1 मूड में बदलाव, सुस्ती और मानसिक थकान रहना

शारीरिक लक्षणों के अलावा जिंक की कमी का गहरा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। जिंक मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर के संचालन को नियंत्रित करने में मदद करता है। शरीर में इसकी कमी होने पर व्यक्ति को हमेशा मानसिक थकान, एकाग्रता की कमी (Lack of Focus), चिड़चिड़ापन, अनावश्यक तनाव और कई मामलों में हल्के डिप्रेशन या एंग्जाइटी के लक्षण महसूस हो सकते हैं। हर वक्त शरीर में सुस्ती बनी रहती है और पर्याप्त नींद लेने के बाद भी ताजगी महसूस नहीं होती है।

#1 जिंक की कमी को पूरा करने के लिए अपनाएं ये प्राकृतिक आहार

शरीर में जिंक की कमी को दूर करने के लिए आपको अपनी डेली डाइट में जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। शाकाहारी स्रोतों में कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds), सूरजमुखी के बीज, काजू, बादाम, छोले, राजमा, मसूर की दाल, पनीर और दूध बेहतरीन विकल्प हैं। वहीं मांसाहारी लोग अंडे, सी-फूड (मछली) और चिकन के माध्यम से इसकी पूर्ति कर सकते हैं। यदि लक्षण बहुत अधिक गंभीर हैं, तो डॉक्टर की सलाह से जिंक के सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं। अपने शरीर के इन छोटे-छोटे बदलावों को पहचानकर समय पर सही खानपान अपनाएं और स्वस्थ जीवन जिएं।