
नौकरी बदलने या नौकरी छोड़ने के बाद भविष्य निधि (EPF) का पैसा निकालने को लेकर कर्मचारियों में अक्सर असमंजस रहता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार नौकरी छूटने के तुरंत बाद पूरा पैसा नहीं निकाला जा सकता, बल्कि इसके लिए बेरोजगारी की अवधि तय की गई है। जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है और नई नौकरी जॉइन नहीं करता, तो उसे दो चरणों में फंड निकालने की अनुमति मिलती है। पहले चरण में लगातार एक महीने (30 दिन) तक बेरोजगार रहने पर कर्मचारी अपने कुल पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75 फीसदी हिस्सा एडवांस के रूप में निकाल सकता है। इस नियम का मकसद यह है कि आपात स्थिति में कर्मचारी को तुरंत आर्थिक सहायता भी मिल जाए और उसका पीएफ खाता भी पूरी तरह बंद न हो। शेष 25 फीसदी बैलेंस खाते में जमा रहता है, जिस पर ईपीएफओ द्वारा घोषित वार्षिक ब्याज लगातार मिलता रहता है। यदि बेरोजगारी की अवधि लगातार दो महीने (60 दिन) पूरी हो जाती है, तो कर्मचारी शेष 25 फीसदी राशि भी निकाल सकता है, यानी तब पूरे 100 फीसदी फंड का फुल एंड फाइनल सेटलमेंट हो जाता है।
यदि आपके ईपीएफ खाते (कर्मचारी शेयर + कंपनी शेयर + अर्जित ब्याज) में ₹1 लाख, ₹3 लाख या ₹5 लाख का फंड जमा है, तो 1 महीने और 2 महीने की बेरोजगारी के बाद मिलने वाली राशि का गणित इस प्रकार रहेगा। मान लीजिए किसी कर्मचारी के खाते में कुल ₹1,00,000 जमा हैं। 1 महीने की बेरोजगारी के बाद वह 75 फीसदी नियम के तहत ₹75,000 की निकासी कर सकता है, जबकि ₹25,000 खाते में सुरक्षित रहेगा। 2 महीने पूरे होने पर वह बचे हुए ₹25,000 भी निकाल सकेगा। इसी प्रकार यदि कुल बैलेंस ₹3,00,000 है, तो 1 महीने बाद 75 फीसदी के हिसाब से ₹2,25,000 की निकासी संभव होगी और ₹75,000 बैलेंस रहेगा, जिसे 2 महीने बाद निकाला जा सकता है। वहीं ₹5,00,000 का फंड होने पर 1 महीने बाद ₹3,75,000 तुरंत निकाले जा सकते हैं और ₹1,25,000 खाते में बरकरार रहेगा, जो 60 दिन की अवधि पूरी होने पर फुल सेटलमेंट में मिल जाएगा।
कर्मचारियों के पीएफ में दो मुख्य हिस्से होते हैं—पहला ईपीएफ (भविष्य निधि) और दूसरा ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना)। कंपनी के 12 फीसदी योगदान में से 8.33 फीसदी हिस्सा पेंशन फंड में जाता है। पेंशन का पैसा निकालने के नियम पीएफ निकासी से बिल्कुल अलग हैं। यदि कर्मचारी की कुल सेवा अवधि (Service Tenure) 10 वर्ष से कम है, तो वह नौकरी छोड़ने के बाद पेंशन का पैसा एकमुश्त (Lump sum) निकाल सकता है। इसके लिए ईपीएफओ का टेबल-डी (Table D) लागू होता है, जिसमें सेवा के वर्षों और अंतिम वेतन के आधार पर एक निर्धारित फॉर्मूले से पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है। यदि कर्मचारी की कुल नौकरी 10 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है, तो नियमों के मुताबिक पेंशन का पैसा बीच में किसी भी हाल में एकमुश्त नहीं निकाला जा सकता। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को ‘स्कीम सर्टिफिकेट’ (Scheme Certificate) जारी किया जाता है और 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर उसे आजीवन मासिक पेंशन (EPS-95) का लाभ मिलता है।
पीएफ का पैसा निकालते समय आयकर और टीडीएस (TDS) के नियमों को समझना बेहद जरूरी है ताकि हाथ में आने वाली रकम में अनावश्यक कटौती न हो। यदि किसी कर्मचारी ने लगातार 5 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी कर ली है, तो पीएफ और ब्याज की पूरी निकासी पूर्णतः कर-मुक्त (Tax-Free) होती है और इस पर कोई टीडीएस नहीं कटता। विभिन्न कंपनियों में किए गए कार्यकाल को यदि यूएएन (UAN) के जरिए ट्रांसफर किया गया है, तो वह भी कुल सेवा में जुड़ता है। यदि कुल सेवा 5 साल से कम है और निकासी राशि ₹50,000 से अधिक है, तो पैन कार्ड लिंक होने की स्थिति में 10 फीसदी टीडीएस काटा जाता है। यदि पीएफ खाते में पैन कार्ड अपडेट नहीं है, तो अधिकतम दर यानी 34.6 फीसदी तक का भारी टीडीएस कट सकता है। हालांकि, यदि कर्मचारी की उस वित्तीय वर्ष में कुल वार्षिक आय कर योग्य सीमा से कम है, तो वह टीडीएस से छूट पाने के लिए फॉर्म 15G (वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H) ऑनलाइन सबमिट कर सकता है।
नौकरी छोड़ने के बाद पीएफ निकासी की पूरी प्रक्रिया अब ईपीएफओ के एकीकृत सदस्य पोर्टल (Unified Member Portal) पर पूरी तरह डिजिटल है। सबसे पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि पिछली कंपनी द्वारा पोर्टल पर नौकरी छोड़ने की तारीख यानी ‘Date of Exit’ दर्ज कर दी गई हो। कर्मचारी खुद भी पोर्टल के ‘Manage’ सेक्शन में जाकर ‘Mark Exit’ विकल्प से अपनी एग्जिट डेट दर्ज कर सकता है। इसके बाद ‘Online Services’ टैब में जाकर ‘Claim (Form-31, 19, 10C & 10D)’ पर क्लिक करना होता है। बैंक खाते के अंतिम 4 अंक डालकर सत्यापन करने के बाद क्लेम फॉर्म का चयन करना होता है। 1 महीने की बेरोजगारी पर 75% एडवांस निकालने के लिए फॉर्म 31 (Non-refundable Advance) चुना जाता है। 2 महीने बाद पूरा पीएफ निकालने के लिए फॉर्म 19 (Only PF Withdrawal) भरा जाता है और 10 साल से कम नौकरी होने पर पेंशन निकालने के लिए फॉर्म 10C (Only Pension Withdrawal) भरना अनिवार्य होता है। सभी विवरण दर्ज करने के बाद आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करते ही क्लेम सबमिट हो जाता है और सामान्यतः 7 से 15 कार्यदिवसों के भीतर राशि सीधे बैंक खाते में क्रेडिट हो जाती है।
girls globe
