
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी (NEET UG) को लेकर जारी अदालती लड़ाई में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। ओएमआर (OMR) आंसर शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कोर्ट का रुख करने वाले एक छात्र को राहत मिलने के बजाय अदालत के कड़े गुस्से का सामना करना पड़ा है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने फर्जी या निराधार दावों के जरिए न्यायिक प्रक्रिया का समय बर्बाद करने पर सख्त टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता परीक्षार्थी पर 1 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना (Cost) ठोक दिया है। इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों के बीच हड़कंप मच गया है जो बिना पुख्ता साक्ष्यों के केवल संदेह के आधार पर अदालती दरवाजे खटखटा रहे थे।
#1. क्या था पूरा मामला और हाई कोर्ट ने क्यों लगाया ₹1 लाख का भारी जुर्माना?
कर्नाटक हाई कोर्ट में दायर याचिका में नीट यूजी अभ्यर्थी ने दावा किया था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा जारी की गई स्कैन की हुई ओएमआर शीट और उसके वास्तविक उत्तरों में भारी भिन्नता है, जिससे उसके अंकों पर विपरीत असर पड़ा है। हालांकि, जब अदालत के निर्देश पर NTA ने छात्र की मूल (ओरिजिनालिटी) ओएमआर उत्तर पुस्तिका और उसकी डिजिटल स्कैन कॉपी को कोर्ट के समक्ष पेश किया, तो दोनों की जांच में कोई अंतर या विसंगति नहीं पाई गई। दोनों शीट बिल्कुल समान निकलने पर हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। पीठ ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि अदालती व्यवस्था और कानूनी प्रक्रियाओं का गलत या बेबुनियाद इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, इसलिए छात्र पर 1 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई जाती है।
#1. देश भर की अदालतों में NTA के खिलाफ 100 से अधिक मामले पेंडिंग, AI एडिटिंग पर रोक की सलाह
नीट यूजी परीक्षा परिणाम और ओएमआर शीट की विश्वसनीयता से जुड़े विवाद केवल एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। देश के विभिन्न राज्यों के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ 100 से भी अधिक याचिकाएं और मामले पेंडिंग हैं या उन पर सुनवाई चल रही है। इस बीच, सोशल मीडिया पर कई स्कैन की गई ओएमआर शीट के स्क्रीनशॉट वायरल हो रहे थे, जिनमें उम्मीदवारों ने कम नंबर मिलने के आरोप लगाए थे। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए NTA ने परीक्षार्थियों को सख्त सलाह दी है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या फोटो एडिटिंग टूल्स की मदद से अपनी स्कैन ओएमआर शीट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करें, क्योंकि एजेंसी के पास सभी की ओरिजिनल हार्ड कॉपी सुरक्षित रखी होती है।
#1. OMR रिस्पॉन्स और स्कैन कॉपी ईमेल पर उपलब्ध, फिर भी भ्रम का माहौल
NTA की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा संपन्न होने और नतीजों की प्रक्रिया के दौरान सभी अभ्यर्थियों को उनकी आधिकारिक स्कैन ओएमआर शीट और दर्ज रिस्पॉन्स उनके रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भेजे जाते हैं। इसके अलावा, उम्मीदवारों को उत्तर कुंजी (Answer Key) को चुनौती देने का भी पर्याप्त अवसर दिया जाता है। इसके बावजूद, कई छात्र और अभिभावक एजेंटों या सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के झांसे में आकर अदालत का रुख कर लेते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक हाई कोर्ट के इस कड़े कदम से उन लोगों को कड़ा संदेश मिलेगा जो बिना पर्याप्त तकनीकी प्रमाण के न्यायिक प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे हैं।
#1. मेडिकल एडमिशन और काउंसलिंग पर क्या पड़ेगा इसका असर?
देश भर में चल रही नीट यूजी की काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच अदालती मुकदमों की भरमार से लाखों छात्रों के मन में अपने एडमिशन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। अदालतों द्वारा NTA की मूल ओएमआर शीट्स और रिकॉर्ड को सही पाए जाने के बाद अब काउंसलिंग की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों ने परीक्षार्थियों और उनके माता-पिता को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया के दावों पर अंधी आस्था जताने के बजाय केवल NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बुलेटिन और अपडेट्स पर ही भरोसा करें, ताकि वे किसी भी तरह के कानूनी और वित्तीय जोखिम से बच सकें।
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