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दिवाली पर बंधनवार खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

दीपों के महापर्व दिवाली की तैयारियां देशभर में पूरे जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पवित्र त्योहार पर धन की देवी मां लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के स्वागत के लिए लोग अपने घरों को बेहद खूबसूरती से सजाते हैं। गृह सज्जा और वास्तु शास्त्र के दृष्टिकोण से घर के मुख्य प्रवेश द्वार (Main Entrance) का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि महालक्ष्मी का आगमन घर के मुख्य द्वार से ही होता है, इसलिए मुख्य द्वार पर सुंदर बंधनवार (तोरण) लगाने की प्राचीन परंपरा रही है। हालांकि, बाजार में मिलने वाले तरह-तरह के आधुनिक और प्लास्टिक के तोरणों के बीच अक्सर लोग बिना विचार किए कोई भी तोरण खरीद लाते हैं। वास्तु शास्त्र के प्रसिद्ध विद्वानों और आचार्यों के अनुसार, गलत सामग्री या गलत दिशा में लगाया गया तोरण घर में वास्तु दोष उत्पन्न कर सकता है, जबकि सही नियमों का पालन करके लगाया गया तोरण घर में सुख, समृद्धि और अपार धन-धान्य लेकर आता है।

#1. दिवाली पर तोरण लगाने का धार्मिक और वास्तु महत्व: क्यों जरूरी है बंधनवार?

सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में किसी भी मांगलिक कार्य या मुख्य त्योहार पर घर के मुख्य द्वार पर तोरण बांधना बेहद शुभ माना जाता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) और मां लक्ष्मी का प्रवेश होता है। मुख्य द्वार पर लगा तोरण केवल सुंदरता बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह एक सुरक्षा कवच की भांति काम करता है जो घर के भीतर नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और राहू-केतु के अशुभ प्रभावों को आने से रोकता है। सही विधि और सही सामग्री से बना तोरण लगाने से घर में वास्तु दोष समाप्त होते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, आरोग्य और खुशहाली का वातावरण बना रहता है।

#1. तोरण खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान: भूलकर भी न लाएं प्लास्टिक और कृत्रिम तोरण

दिवाली के लिए जब आप बाजार से बंधनवार खरीदने जाएं, तो सबसे पहले उसकी सामग्री (Material) का विशेष ध्यान रखें। वास्तु गुरुओं का स्पष्ट कहना है कि आजकल बाजार में मिलने वाले प्लास्टिक, सिंथेटिक या लोहे के बने आर्टिफिशियल तोरण देखने में भले ही आकर्षक लगें, लेकिन वास्तु के दृष्टिकोण से इन्हें मुख्य द्वार पर लगाना अशुभ माना जाता है। प्लास्टिक और कृत्रिम सामग्रियां सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के बजाय रोकती हैं। इसके विपरीत, हमेशा प्राकृतिक चीजों जैसे आम के पत्तों, अशोक के पत्तों, गेंदे के फूलों या फिर शुद्ध सूती (कपास), रेशम और कौड़ियों से बने पारंपरिक तोरण को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। प्राकृतिक पत्तों और फूलों में जीवन ऊर्जा होती है जो घर के वातावरण को शुद्ध करती है और लक्ष्मी जी को प्रसन्न करती है।

#1. वास्तु अनुसार किस दिशा और धातु का तोरण रहेगा शुभ?

वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार, यदि आपके घर का मुख्य द्वार पूर्व (East) दिशा में है, तो तांबे की धातु, गेंदे के पीले/नारंगी फूल या हरे पत्तों से बना तोरण लगाना सबसे उत्तम होता है। यदि मुख्य द्वार उत्तर (North) दिशा में है, तो कौड़ियों, मोतियों और हरे रंग के कपड़ों से सजा तोरण धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की असीम कृपा लाता है। पश्चिम (West) दिशा के द्वार के लिए नीले, सफेद या धातु के प्रतीकों वाला तोरण शुभ माना जाता है, जबकि दक्षिण (South) दिशा वाले मुख्य द्वार पर लाल रंग के धागों, गेंदे के फूलों और शुभ चिन्हों जैसे स्वास्तिक या ॐ वाले तोरण को लगाना चाहिए। इसके अलावा तोरण पर स्वास्तिक, कलश, शुभ-लाभ या लक्ष्मी जी के चरणों के प्रतीक चिन्ह बने होना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।

#1. तोरण टांगने के सही नियम और सावधानियां: कब और कैसे लगाएं बंधनवार?

दिवाली के दिन तोरण लगाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है। सबसे पहले मुख्य द्वार की अच्छी तरह सफाई करें और वहां गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। तोरण को हमेशा द्वार के सबसे ऊपरी हिस्से पर इस तरह बांधें कि वह आने-जाने वाले व्यक्ति के सिर को न छुए और न ही बहुत नीचे लटके। यदि आप आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि पत्ते सूखे या कटे-फटे न हों। जैसे ही पत्ते पूरी तरह सूख जाएं, उन्हें आदरपूर्वक निकालकर जल में प्रवाहित कर दें और नया तोरण लगाएं। सूती धागे या प्राकृतिक डोरी से तोरण बांधना सबसे शुभ होता है। इस दिवाली इन आसान वास्तु नियमों को अपनाकर आप भी अपने घर में मां महालक्ष्मी के स्थाई वास का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।