
देशभर के सर्राफा बाजारों में त्योहारी और सहालग के मौसम से ठीक पहले खरीदारों और निवेशकों के लिए एक अप्रत्याशित लेकिन राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले दस दिनों के कारोबारी सत्र के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी बिकवाली के चलते दोनों कीमती धातुओं के दाम तेजी से नीचे फिसले हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर स्थानीय रिटेल बाजारों तक सोने की कीमतों में करीब ₹5,840 प्रति 10 ग्राम तक की कमी देखने को मिली है, जबकि चांदी ने निवेशकों को बड़ा झटका देते हुए प्रति किलोग्राम ₹25,000 तक का भारी गोता लगाया है। इस गिरावट ने आम उपभोक्ताओं, खासकर शादी-ब्याह के लिए आभूषण खरीदने की योजना बना रहे परिवारों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, वहीं लगातार रिकॉर्ड स्तर पर खरीदारी करने वाले सटोरियों और शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के बीच हलचल तेज कर दी है।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई वैश्विक बिकवाली का असर सीधे तौर पर भारतीय घरेलू बाजार पर दिखाई दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो दस दिन पहले जो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों को छू रहा था, वह धीरे-धीरे मुनाफावसूली का शिकार होकर ₹5,840 प्रति 10 ग्राम तक नीचे आ चुका है। वहीं औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज पर आए अचानक दबाव के कारण चांदी में रिकॉर्ड ₹25,000 प्रति किलो की गिरावट आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर इंडेक्स की मजबूती, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर आए सख्त रुख और तकनीकी चार्ट्स पर ओवरबॉट जोन से हुई भारी लिक्विडेशन का नतीजा है।
सर्राफा विशेषज्ञों और कमोडिटी विश्लेषकों के मुताबिक इस तेज गिरावट के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक और तकनीकी कारण सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। पहला बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल है, जिससे सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग पर तात्कालिक दबाव बना। दूसरा बड़ा कारण पश्चिमी एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के बीच अस्थायी स्थिरता के संकेत और क्रूड ऑयल की चाल में बदलाव रहा, जिसके बाद बड़े हेज फंड्स ने सोने में जमा अपनी लंबी पोजिशंस को काटकर मुनाफा निकालना शुरू किया। तीसरा कारण चांदी का औद्योगिक उपयोग है; वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक और सोलर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से शॉर्ट टर्म मांग में सुस्ती की खबरों ने चांदी के वायदा अनुबंधों में पैनिक सेलिंग को हवा दे दी, जिससे घरेलू बाजार में चांदी सीधे धड़ाम हो गई।
गिरावट के बाद देश के प्रमुख बाजारों में शुद्धता के आधार पर सोने के भाव काफी आकर्षक स्तर पर आ चुके हैं। 24 कैरेट शुद्ध सोना (999 फाइन गोल्ड), जिसे आमतौर पर बिस्किट, बार और शुद्ध सिक्कों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है, अब राष्ट्रीय औसत पर करीब ₹1,38,400 से ₹1,42,100 प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड कर रहा है। आभूषण निर्माण के लिए सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाला 22 कैरेट सोना (916 हॉलमार्क) टूटकर लगभग ₹1,27,450 से ₹1,30,250 प्रति 10 ग्राम के आसपास आ पहुंचा है। वहीं कॉलेज वियर, लाइटवेट और डायमंड ज्वेलरी के शौकीनों के लिए 18 कैरेट सोने का भाव गिरकर ₹1,04,300 से ₹1,06,650 प्रति 10 ग्राम के करीब दर्ज किया जा रहा है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि ये दरें मेटल एक्सचेंज की बेस वैल्यू हैं और बिल बनवाते समय इस पर 3 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) और ज्वैलर का मेकिंग चार्ज अलग से जोड़ा जाता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों और शहरों में स्थानीय टैक्स, ढुलाई भाड़ा और मर्चेंट एसोसिएशन के आधार पर भाव में मामूली अंतर देखा जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के स्थानीय अमीनाबाद और चौक सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग ₹1,39,030 से ₹1,42,190 प्रति 10 ग्राम पर स्थिर बना हुआ है, जबकि 22 कैरेट आभूषण गोल्ड ₹1,27,450 प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कूचा महाजनी बाजार में 24 कैरेट गोल्ड करीब ₹1,42,300 प्रति 10 ग्राम पर है। मुंबई के प्रसिद्ध जवेरी बाजार में बेस रेट ₹1,38,480 प्रति 10 ग्राम पर देखा गया, जो देश के अन्य हिस्सों की तुलना में परिवहन लागत कम होने के कारण थोड़ा सस्ता रहता है। दक्षिण भारत के चेन्नई और बेंगलुरु में स्थानीय मांग के बावजूद भाव में भारी नरमी देखी गई है, जहां चांदी का भाव ₹1,80,000 से ₹1,85,000 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है, जो दस दिन पहले ₹2,05,000 से ₹2,10,000 के पार निकल चुका था।
चांदी में आई ₹25,000 प्रति किलोग्राम की तेज मंदी ने बाजार के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। सबसे बड़ा लाभ उन आम ग्राहकों को हुआ है जो आगामी शादी के सीजन के लिए चांदी के बर्तन, सिक्के और भारी पायल या मूर्तियां खरीदने की तैयारी कर रहे थे। पिछले महीने चांदी की कीमतें जिस तरह बेलगाम होकर आसमान छू रही थीं, उससे बजट बिगड़ चुका था, लेकिन इस गिरावट ने खरीद क्षमता में भारी इजाफा किया है। इसके विपरीत, जिन सटोरियों ने चांदी के ₹2 लाख से ऊपर जाने पर तेजी का दांव लगाया था, उनके स्टॉप लॉस कट गए और उन्हें भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि फिजिकल डिमांड में अब दोबारा सुधार होने की उम्मीद है क्योंकि भारतीय ग्राहक आमतौर पर गिरते बाजार में बॉटम फिशिंग यानी गिरावट पर खरीदारी करना पसंद करते हैं।
बुलियन मार्केट के वरिष्ठ रणनीतिकारों का मानना है कि सोने और चांदी में लंबी अवधि का ढांचा अभी भी काफी मजबूत बना हुआ है। केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने के वैश्विक भंडार में लगातार की जा रही खरीदारी सोने के भाव को एक मजबूत मनोवैज्ञानिक सपोर्ट देती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर आप शादियों या निजी उपयोग के लिए गहने बनवाना चाहते हैं, तो यह गिरावट खरीदारी शुरू करने का एक बेहतरीन मौका है। हालांकि, निवेशकों को एक साथ अपनी पूरी पूंजी लगाने के बजाय चरणों में (SIP मोड में) खरीदारी करनी चाहिए, क्योंकि बाजार में अभी कुछ दिन और उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सस्ते भाव देखकर बाजार में खरीदारी करने से पहले हर उपभोक्ता को कुछ तकनीकी नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। सोना खरीदते समय हमेशा 6 अंकों वाले अल्फ़ान्यूमेरिक HUID (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन) कोड की जांच करें, जिससे सोने की शुद्धता सरकार द्वारा प्रमाणित होती है। किसी भी गैर-हॉलमार्क आभूषण को खरीदने से बचें, भले ही दुकानदार उस पर मेकिंग चार्ज में छूट की पेशकश कर रहा हो। इसके अलावा, ज्वैलर से पक्का जीएसटी बिल लेना न भूलें, जिसमें सोने का कुल वजन, उसकी शुद्धता (जैसे 22K916 या 18K750), उस दिन का लागू भाव और मेकिंग चार्ज का ब्योरा अलग-अलग दर्ज होना चाहिए। बिल में पारदर्शिता रहने से भविष्य में उसी गहने को बदलने या रीसेल करते समय किसी प्रकार की कटौती का सामना नहीं करना पड़ता।
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