
देश में निष्पक्ष चुनावी प्रणाली, मतदाता सूचियों में कथित विलोपन और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर छिड़े सियासी संग्राम के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर अब तक का सबसे तीखा और सीधा हमला बोला है। दिल्ली में विपक्ष की महारैली की पूर्व संध्या पर अपने कड़े तेवरों के साथ सामने आए राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि पद से जुड़ी किसी भी प्रकार की ‘कानूनी इम्युनिटी’ (संवैधानिक सुरक्षा कवच) उन्हें भविष्य में जवाबदेही से नहीं बचा पाएगी। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल नरेंद्र मोदी और अमित शाह से लोकतांत्रिक व राजनीतिक मोर्चे पर सीधे निपट लेंगे, लेकिन संवैधानिक कुर्सी पर बैठकर देश के मतदाताओं की पीठ में छुरा घोंपने वालों को कतई बख्शा नहीं जाएगा।
राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद एक निष्पक्ष अंपायर की तरह पूरे देश के विश्वास की रक्षा करने के लिए बनाया गया था, न कि सत्ताधारी दल के राजनीतिक हितों को साधने के लिए। उन्होंने कहा:
“ज्ञानेश कुमार जी यह मुगालता अपने दिमाग से निकाल दें कि संविधान के तहत मिलने वाली कानूनी इम्युनिटी उन्हें हमेशा के लिए सुरक्षा घेरा देती रहेगी। सरकारें हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं, सत्ता बदलती है, लेकिन देश का संविधान और कानून हमेशा कायम रहता है। जब भी स्वतंत्र जांच होगी, तो लोकतंत्र के बुनियादी अधिकार यानी वोट की चोरी करने वालों को एक-एक दस्तावेज का हिसाब देना होगा।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का शीर्ष नेतृत्व नियमों और प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर ऐसे फैसले ले रहा है, जिससे करोड़ों नागरिकों का वोटिंग अधिकार छिनने की कगार पर पहुंच गया है।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग के रिश्तों पर हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष राजनीतिक विरोधियों से डरता नहीं है। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी और अमित शाह हमारे राजनीतिक विरोधी हैं, वे चुनावी मैदान में जो रणनीति अपनाना चाहें अपनाएं, उनसे कैसे निपटना है और जनता के बीच उन्हें कैसे हराना है, यह हमें भली-भांति आता है। लेकिन जब देश के स्वतंत्र चुनाव आयोग की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति ही निष्पक्षता का चोला उतारकर एक खास दल की बी-टीम की तरह काम करने लगे, तो यह राजनीति नहीं बल्कि लोकतंत्र और देशद्रोह के समान गंभीर अपराध बन जाता है।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की राय को नजरअंदाज कर मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण (SIR) में एकतरफा आदेश पारित किए गए, जिसका सीधा नुकसान गरीब, पिछड़े, अल्पसंख्यक और वंचित तबके के मतदाताओं को उठाना पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि पहले देश की जनता ने बिना तैयारी के थोपी गई ‘नोटबंदी’ का दंश झेला था, और अब सुनियोजित षड्यंत्र के तहत देश में ‘वोटबंदी’ का खेल खेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर के निर्वाचन क्षेत्रों से उन मतदाताओं के नाम छांट-छांटकर हटाए या निष्क्रिय किए जा रहे हैं, जो मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर हैं। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के निर्वाचित सांसदों और प्रतिनिधिमंडलों ने चुनाव आयोग से मिलकर मतदाता सूची में विसंगतियों के ठोस सबूत सौंपने चाहे, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ने मिलने से इनकार कर दिया। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब किसी संस्था के पास छिपाने को कुछ नहीं होता, तो वह जनता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के सवालों से क्यों भागती है?
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल संसद के पटल या अदालत के कमरों तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने देश के युवाओं, छात्रों, किसानों और आम नागरिकों से संविधान और अपने वोट की रक्षा के लिए उठ खड़े होने का आह्वान किया। राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में जुटने वाला विशाल जनसैलाब इस बात का खुला संदेश देगा कि भारत की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी प्रकार का डाका बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने दोहराया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के पास दस्तावेजी साक्ष्यों की पूरी फाइल तैयार है, और जब समय आएगा, तो न्यायपालिका और जनता की अदालत दोनों में इस जवाबदेही को पूरी कठोरता से सुनिश्चित कराया जाएगा।
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