
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) के परिसर में एक बार फिर से धार्मिक बयानबाजी और विवादों का दौर शुरू हो गया है। यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले स्थल ‘लाल बारादरी’ (Lal Baradari) पर विशेष समुदाय के कुछ लोगों द्वारा नमाज पढ़ने की सार्वजनिक मांग किए जाने के बाद से कैंपस का राजनीतिक और सामाजिक पारा चढ़ गया है। इस मांग के सामने आते ही अखिल भारत हिन्दू महासभा और कई छात्र संगठनों ने तीखा विरोध जताना शुरू कर दिया है। हिंदू महासभा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक और धार्मिक अखाड़ा बनाने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस इस संवेदनशील मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है, ताकि कैंपस की शांति और सुरक्षा व्यवस्था किसी भी कीमत पर भंग न हो सके।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय मंचों के माध्यम से लखनऊ विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित ऐतिहासिक ‘लाल बारादरी’ पर नमाज अदा करने की अनुमति देने या वहां धार्मिक गतिविधियां संचालित करने की मांग उठाई गई। ‘लाल बारादरी’ अवध के नवाबों के शासनकाल की एक ऐतिहासिक और संरक्षित इमारत है, जो यूनिवर्सिटी के मुख्य कला और संस्कृति परिसर के अंतर्गत आती है। शिक्षा के मंदिर में इस तरह की अचानक धार्मिक मांग उठने से सामान्य छात्रों, शिक्षकों और पुरातत्व प्रेमियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। आलोचकों और छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर ज्ञान, विज्ञान, शोध और बौद्धिक चर्चाओं का केंद्र है, न कि किसी विशेष समुदाय के धार्मिक अनुष्ठान या प्रदर्शन की जगह। इस प्रकार की मांगों से यूनिवर्सिटी के सेक्युलर और शैक्षणिक माहौल को जानबूझकर आहत करने की कोशिश की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अखिल भारत हिन्दू महासभा ने बेहद आक्रामक और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोप लगाया है कि लखनऊ यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान में इस तरह की मांगें उठाना कोई संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र है। उनका कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व उत्तर प्रदेश की शांति और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए यूनिवर्सिटी परिसरों को निशाना बना रहे हैं। महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में तुरंत सख्त कदम उठाते हुए ऐसे तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो हिंदू संगठन बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षण संस्थानों को केवल पढ़ाई और करियर निर्माण तक सीमित रखना चाहिए, न कि वहां धार्मिक तड़का लगाकर राजनीति करनी चाहिए।
मामले के तूल पकड़ने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से सतर्क हो गया है। यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की अनधिकृत धार्मिक गतिविधि या प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लखनऊ यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुसार कैंपस पूरी तरह से सेक्युलर जोन है जहां सभी छात्र केवल शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। एहतियात के तौर पर लाल बारादरी और उसके आसपास के इलाकों में यूनिवर्सिटी के सुरक्षा गार्डों की गश्त बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी स्थिति की गंभीरता से अवगत करा दिया गया है ताकि किसी भी बाहरी तत्व या उपद्रवी को विश्वविद्यालय की शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करने का मौका न मिल सके। खुफिया एजेंसियां भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को तूल देने वाले अकाउंट्स की निगरानी कर रही हैं।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर से देश भर के विश्वविद्यालयों में बढ़ती जा रही वैचारिक और धार्मिक खींचतान पर गंभीर बहस छेड़ दी है। लखनऊ यूनिवर्सिटी के वर्तमान और पूर्व छात्रों का मानना है कि ऐसे विवादों से संस्थान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग तथा उसकी गरिमा को भारी नुकसान पहुंचता है। शिक्षाविदों का कहना है कि छात्रों को पढ़ाई, रिसर्च और इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को ऐसे मुद्दों में उलझाना चाहिए जो समाज में ध्रुवीकरण पैदा करते हैं। प्रशासन की मुस्तैदी के कारण फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षण संस्थानों में अनुशासन और वैचारिक शुद्धता बनाए रखने के लिए प्रशासन को भविष्य में और अधिक कड़े और स्पष्ट नियम लागू करने की आवश्यकता है।
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