
वैश्विक तकनीकी और सेमीकंडक्टर बाजार से इस वक्त अमेरिकी शेयर बाजार को हिला देने वाली एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। दुनिया की दिग्गज चिप निर्माता कंपनी इंटेल (Intel) के शेयरों में शुक्रवार को एक ऐसा भूचाल आया जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर लगातार बनी चिंताओं, पर्सनल कंप्यूटर (PC) की घटती मांग, कमजोर कारोबारी अनुमान और मध्य पूर्व स्थित एक मुख्य प्लांट में उत्पादन कई दिनों तक ठप रहने के कारण इंटेल के शेयरों में लगभग 29 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। यह सनसनीखेज गिरावट 1970 के दशक के बाद से कंपनी के इतिहास में एक दिन में आई सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इस अप्रत्याशित क्रैश के चलते इंटेल के मार्केट कैप में एक ही झटके में करीब 140 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से 13.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम रकम स्वाहा हो गई है। सिर्फ प्राइवेट निवेशकों और बाजार को ही नहीं, बल्कि इस मंदी की चपेट में अमेरिकी सरकार और दिग्गज टेक कंपनियां भी आ गई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इंटेल के इस भयानक स्टॉक क्रैश के पीछे की मुख्य वजहें क्या हैं और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है।
कमजोर कारोबारी अनुमान और उम्मीदों पर पानी फिदने से निवेशकों में मची भगदड़
इंटेल के शेयरों में आई इस तबाही की सबसे बड़ी वजह कंपनी द्वारा जारी किया गया वह कमजोर कारोबारी अनुमान है जिसने बाजार की उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया। कंपनी ने चालू तिमाही के लिए 15 अरब डॉलर से 16 अरब डॉलर के बीच रेवेन्यू रहने का अनुमान जताया है, जो वॉल स्ट्रीट और मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुमान से काफी ज्यादा कम है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FactSet के आंकड़ों के मुताबिक बाजार को यह उम्मीद थी कि इंटेल का रेवेन्यू 17 अरब डॉलर से अधिक रहेगा।
जब निवेशकों ने कंपनी के इन निराशाजनक आंकड़ों को देखा, तो उन्होंने भारी बिकवाली (Sell-off) शुरू कर दी। जानकारों का मानना है कि इंटेल के सामने इस समय दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ जहां दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ने के कारण मेमोरी चिप्स के दाम आसमान छू रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके चलते सामान्य कंप्यूटरों के दाम भी महंगे हो रहे हैं, जिसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ रहा है। पर्सनल कंप्यूटर बाजार में इस साल लगभग 12 फीसदी और आगामी 2027 में 10 फीसदी तक की भारी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है, जिससे इंटेल की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।
अमेरिकी सरकार को भी लगा 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का झटका
इंटेल के शेयरों में आई इस ऐतिहासिक गिरावट का दायरा सिर्फ प्राइवेट निवेशकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर अमेरिकी सरकार (US Government) के निवेश पर भी पड़ा है। अमेरिका सरकार के पास पिछले साल किए गए एक रणनीतिक निवेश के तहत इंटेल की करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है।
शुक्रवार को आए इस भारी क्रैश के बाद अमेरिकी सरकार के पास मौजूद इस हिस्सेदारी के मूल्य में एक झटके में करीब 12 अरब डॉलर यानी भारतीय रुपये के मुताबिक लगभग 1.14 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आ गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सरकार का यह निवेश अभी भी मुनाफे के दायरे में बना हुआ है, लेकिन एक ही दिन में सरकारी पोर्टफोलियो को लगे इस बड़े धक्के ने प्रशासनिक हलकों में भी चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, इंटेल में एक बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली दिग्गज चिप कंपनी Nvidia के निवेश के मूल्य में भी करीब 6 अरब डॉलर यानी लगभग 57,000 करोड़ रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
इजरायल में फैक्ट्री बंद होने और सप्लाई चेन की बाधाओं ने बढ़ाई मुश्किलें
आर्थिक मंदी और बाजार के दबाव के बीच इंटेल के इंटरनल ऑपरेशंस में आई बाधाओं ने आग में घी का काम किया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) लिप-बू टैन (Lip-Bu Tan) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि हाल ही में इजरायल स्थित कंपनी की एक मुख्य फैक्ट्री में एक अप्रत्याशित दुर्घटना हो गई थी, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से उत्पादन को कई हफ्तों तक पूरी तरह बंद रखना पड़ा।
फैक्ट्री बंद रहने से ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई और समय पर ग्राहकों को सामान पहुंचाना कंपनी के लिए असंभव सा हो गया। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट बनाने में इस्तेमाल होने वाले एक बुनियादी कच्चे माल की भारी किल्लत का सामना भी कंपनी को करना पड़ रहा है। हालांकि, प्रबंधन का यह भी कहना है कि वे उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहे हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम अगले साल की दूसरी छमाही से मिलना शुरू हो जाएगा।
CEO लिप-बू टैन के लिए कड़ी परीक्षा, विश्लेषकों ने घटाई रेटिंग
मार्च 2025 में इंटेल की कमान संभालने वाले CEO लिप-बू टैन के लिए यह संकट किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। उन्होंने पद संभालते ही कंपनी के लड़खड़ाते कारोबार को दोबारा पटरी पर लाने और AI सेक्टर में उसकी खोई हुई जमीन को वापस पाने के लिए कई कड़े कदम उठाए थे।
गौरतलब है कि गुरुवार को वित्तीय नतीजे आने से ठीक पहले तक इंटेल के शेयर इस साल शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग 150 फीसदी तक चढ़ चुके थे। सर्वर और AI से जुड़े कार्यों में सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट्स (CPUs) की बढ़ती मांग के कारण निवेशकों का भरोसा कंपनी पर बना हुआ था। लेकिन शुक्रवार के इस बड़े झटके के बाद बाजार का मूड पूरी तरह बदल गया। प्रसिद्ध वित्तीय एजेंसी D.A. Davidson के एनालिस्ट ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इंटेल के शेयर की रेटिंग को ‘Buy’ से घटाकर ‘Neutral’ कर दिया। उनका साफ तौर पर कहना था कि पर्सनल कंप्यूटर बाजार में कमजोरी बहुत अधिक गहरी है और मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच कंपनी के शेयर के वर्तमान मूल्यांकन (Valuation) को उचित ठहराना बेहद मुश्किल है।
AI और डेटा सेंटर कारोबार में 78% की जोरदार बढ़त, उम्मीद की एक किरण
इन तमाम निराशाजनक खबरों और वित्तीय चुनौतियों के बीच इंटेल के लिए कुछ सकारात्मक पहलू भी सामने आए हैं, जो भविष्य में कंपनी की डूबती नैया को पार लगाने की क्षमता रखते हैं। कंपनी के डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कारोबार के रेवेन्यू में सालाना आधार पर 78 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इंटेल का अनुमान है कि भविष्य में ‘एजेंटिक AI’ (Agentic AI) के बढ़ते इस्तेमाल से सर्वर में CPU की मांग में भूचाल आ सकता है। कंपनी का आंतरिक आकलन बताता है कि आने वाले पांच वर्षों में वैश्विक स्तर पर सर्वर CPU का बाजार 40 अरब डॉलर से बढ़कर सीधे 200 अरब डॉलर के विशाल आंकड़े को छू सकता है। यदि इंटेल समय रहते अपनी उत्पादन समस्याओं से उबरने में कामयाब हो जाती है, तो यह सेक्टर उसके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
फिलहाल, बाजार का सारा ध्यान कंपनी के कमजोर राजस्व अनुमान, PC मार्केट की सुस्ती और प्लांट बंद होने की वजह से पैदा हुई समस्याओं पर केंद्रित है। इंटेल के शेयरों में आई इस सुनामी का असर ग्लोबल चिप सेक्टर की अन्य दिग्गज कंपनियों पर भी साफ देखने को मिला, और Broadcom, AMD तथा Micron जैसी कंपनियों के शेयरों पर भी भारी दबाव बना रहा। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि इंटेल का मैनेजमेंट इस बड़े वित्तीय संकट से उबरने के लिए कौन सी नई रणनीतिक चाल चलता है।
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